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Deoghar News: बाबा भोलेनाथ की सेवा को ले कैदियों में उत्साह, पूर्णिमा पर श्रृंगार पूजा के लिए जेल से निकलेंगे दो पुष्प मुकुट

5 किलो फूलों से तैयार होंगे बाबा के दो मुकुट, देवघर जेल के कैदी निभाएंगे वर्षों पुरानी परंपरा, अंग्रेज जेलर के बेटे के स्वस्थ होने से जुड़ी है मान्यता

by Kanchan Kumar
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देवघर : बाबा भोलेनाथ की सेवा में हाथ बंटाने के लिए कैदियों में काफी उत्साह है। मंडल कारा के बंदियों द्वारा तैयार किए जाने वाले विशेष पुष्प मुकुट इस बार भी सावन पूर्णिमा पर बाबा बैद्यनाथ और बाबा बासुकिनाथ के मस्तक की शोभा बढ़ाएंगे। अंग्रेज शासन से चली आ रही इस अनोखी और पवित्र परंपरा के तहत पूर्णिमा की शाम जेल परिसर से एक साथ दो मुकुट बाहर निकाले जाते हैं।

​इनमें से एक पुष्प मुकुट बाबा बैद्यनाथ की शाम की भव्य श्रृंगार पूजा के लिए भेजा जाता है, जिसे जेल अधीक्षक या जेलर खुद लेकर जाते हैं। वहीं दूसरा मुकुट कड़ी सुरक्षा के बीच वाहनों से बाबा फौजदारीनाथ (बासुकिनाथ) के दरबार में अर्पित करने के लिए भेजा जाता है।

​सावन पूर्णिमा पर क्यों बनते हैं दो मुकुट

आमतौर पर देवघर जेल के कैदी रोजाना बाबा बैद्यनाथ के श्रृंगार के लिए एक पुष्प मुकुट (नाग मुकुट) बनाते हैं। लेकिन महाशिवरात्रि के दिन परंपरा के अनुसार बाबा को फूलों के मुकुट की जगह विवाह का विशेष ‘मोउर’ चढ़ाया जाता है। उसी दिन का नियम पूरा करने और भरपाई के तौर पर सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर दो मुकुट तैयार किए जाते हैं।

​5 किलो फूलों से सजती है आस्था

एक पुष्प मुकुट को तैयार करने में लगभग 5 किलो ताजे फूलों और पत्तियों का उपयोग होता है। इसे बनाने में कैदियों के साथ जेल कर्मी भी पूरी भक्ति-भावना के साथ हाथ बंटाते हैं। ​इस अवसर पर जेल के अंदर धार्मिक माहौल रहता है। जेल स्थित बाबा कक्ष में आयोजित संकीर्तन का समापन होने के साथ ही, सावन पूर्णिमा की सुबह से बाबा शृंगार मंदिर में 24 घंटे का अखंड संकीर्तन शुरू हो जाता है। मुकुट रवाना करने के बाद जेल परिसर में बंदियों, अधिकारियों और मेहमानों के बीच महाप्रसाद बांटा जाता है।

​अंग्रेज जेलर से जुड़ी है ऐतिहासिक मान्यता

इस परंपरा की शुरुआत को लेकर कोई आधिकारिक दस्तावेज भले ही न हो, लेकिन जनश्रुति के अनुसार ब्रिटिश शासन काल में देवघर के एक अंग्रेज जेलर के बेटे की तबीयत काफी बिगड़ गई थी। डॉक्टरों के जवाब देने के बाद स्थानीय लोगों की सलाह पर जेलर ने बाबा बैद्यनाथ को फूलों का मुकुट चढ़ाने की मन्नत मांगी।

चमत्कारिक रूप से उनका बेटा पूरी तरह स्वस्थ हो गया। उसी दिन से जेल में बंदियों द्वारा बाबा का मुकुट तैयार करने की यह प्रथा अनवरत चली आ रही है, जो आज भी आस्था और आध्यात्मिक बदलाव का अनोखा प्रतीक बनी हुई है।

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