देवघर : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर झारखंड की धार्मिक नगरी देवघर स्थित प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर में आस्था का विराट दृश्य देखने को मिला। देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन के लिए घंटों लंबी कतारों में प्रतीक्षा की। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंजता रहा।

महाशिवरात्रि 2026 : देवघर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में 11 घंटे से कतार
मंदिर प्रशासन के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात 12 बजे से ही श्रद्धालु कतार में लगने लगे थे। सुबह 4 बजे आम भक्तों के लिए मंदिर के पट खोले गए, जिसके बाद दर्शन-पूजन का सिलसिला लगातार जारी रहा। कई श्रद्धालुओं को लगभग 11 घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा, लेकिन दर्शन के बाद उनके चेहरे पर संतोष और श्रद्धा स्पष्ट झलक रही थी। रात 9 बजे तक आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन मिल सके।
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु, आस्था का अद्भुत संगम
बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से शिवभक्त देवघर पहुंचे हैं। पटना से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से महाशिवरात्रि पर बाबा के दर्शन के लिए आ रहे हैं। उनका कहना है कि इस दिन स्पर्श पूजन का विशेष महत्व है। वहीं एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि 11 घंटे के इंतजार के बाद बाबा के दर्शन से सारी थकान दूर हो गई और उन्हें आध्यात्मिक संतोष की अनुभूति हुई। महाशिवरात्रि के अवसर पर देवघर का धार्मिक वातावरण चरम पर है। स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
चार प्रहर की विशेष पूजा और शिव-विवाह उत्सव
महाशिवरात्रि के दिन रात 10 बजे से चार प्रहर की विशेष पूजा आरंभ होगी, जो सुबह 3 बजे तक चलेगी। षोडशोपचार विधि से भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाएगी। दूध, दही, घी, फल, मेवा, गंगाजल, बेलपत्र, भांग, चंदन और धूप सहित विभिन्न पूजन सामग्रियां अर्पित की जाएंगी। इसके बाद पारंपरिक रूप से शिव-विवाह उत्सव का आयोजन होगा।
विशेष अनुष्ठान के दौरान सरदार पंडा गुलाबनंद ओझा द्वारा विधिवत पूजा संपन्न कराई जाएगी। बाबा का भव्य श्रृंगार किया जाएगा और माता पार्वती को साड़ी, सिंदूर, बिंदी और चूड़ियां अर्पित की जाएंगी। पूरा मंदिर परिसर शिव-विवाह की धार्मिक परंपराओं से आलोकित रहेगा।
मोर मुकुट चढ़ाने की परंपरा
महाशिवरात्रि पर मोर मुकुट अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जा रही है। मान्यता है कि अविवाहित श्रद्धालु यदि बाबा के पंचशूल पर मोर मुकुट अर्पित करते हैं तो उनकी विवाह संबंधी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस विशेष अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं।

