धनबाद : प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम धनबाद में कोयला कारोबार से जुड़े कई प्रमुख कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। ईडी ने धनसार स्थित कोयला आउटसोर्सिंग कंपनी डेको के संचालक मनोज अग्रवाल और कंपनी के निदेशक ए.एन. झा के आवास सहित कई ठिकानों पर दस्तावेज़ों और रिकॉर्ड की विस्तृत जांच शुरू की है।
ईडी की टीम ने सुधीर चौटाला और इंद्रराज भदौरिया के ठिकानों पर भी तलाशी अभियान तेज कर दिया है। मनोज अग्रवाल न केवल डेको आउटसोर्सिंग कंपनी के संचालक हैं, बल्कि कोयला परिवहन कार्य से भी जुड़े हुए हैं। ईडी की यह कार्रवाई कोयला के अवैध कारोबार और उससे जुड़े मनी लांड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा मानी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि 21 नवंबर को ईडी ने कोयला कारोबारी दीपक पोद्दार सहित कई अन्य कारोबारियों के आवास और कार्यालयों पर भी छापेमारी की थी। उस दौरान कोलकाता ईडी की टीम भी शामिल थी, जो पश्चिम बंगाल के ठिकानों पर कार्रवाई कर रही थी।
उस छापेमारी में ईडी को कई करोड़ रुपये, महत्वपूर्ण दस्तावेज और चल–अचल संपत्तियों के अहम सबूत मिले थे। जांच के दौरान ईडी को पता चला कि कोयला के अवैध कारोबार में इंद्रराज भदौरिया, सुधीर चौटाला और मनोज अग्रवाल की भी भूमिका है। इसके आधार पर एजेंसी ने इन कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई और तेज कर दी है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इंद्रराज भदौरिया झारखंड और पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े कोयला ट्रांसपोर्टरों में से एक माने जाते हैं। उनकी कंपनी दोनों राज्यों से देशभर की विभिन्न पावर कंपनियों तक कोयला सप्लाई करती है। भदौरिया के नेटवर्क में कई अन्य कोयला ट्रांसपोर्टर भी जुड़े हुए हैं।
अवैध संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की जांच
प्रवर्तन निदेशालय की इस रेड को कोयला कारोबार से जुड़े अवैध वित्तीय लेन-देन और संपत्ति अर्जन की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारियों ने संभावित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क, शेल कंपनियों और बाहरी राज्यों में संपत्ति निवेश के एंगल को खंगालना शुरू किया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई 21 नवंबर को धनबाद और पश्चिम बंगाल में किए गए ईडी के बड़े अभियान की कड़ी में की जा रही है, जब कई कोयला कारोबारियों के घरों और दफ्तरों से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए थे।
सुबह-सुबह घेराबंदी कर शुरू हुई रेड
शुक्रवार सुबह शुरू हुई छापेमारी के दौरान ईडी की टीम ने सभी संबंधित परिसरों को घेरकर तलाशी शुरू की। स्थानीय पुलिस को भी क्षेत्र में तैनात कर दिया गया, ताकि किसी तरह की भीड़भाड़ या बाहरी दखल से जांच प्रभावित न हो। ईडी अधिकारियों ने डिजिटल फाइलें, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन, लैपटॉप डेटा, बैंकिंग ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का अधिग्रहण किया। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि कोयला आउटसोर्सिंग से जुड़े वित्तीय लाभ किस तरह विभिन्न खातों और कंपनियों के माध्यम से आगे बढ़ाए गए।
जांच जारी, कई अहम खुलासों की उम्मीद
ईडी की यह कार्रवाई अभी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त दस्तावेजों से आगे और भी बड़े वित्तीय नेटवर्क उजागर हो सकते हैं। फिलहाल ईडी ने रेड को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह कार्रवाई कोयला कारोबार में चल रहे अवैध आर्थिक गतिविधियों की गहराई तक जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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