रांची : झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 (Jharkhand Assembly Election 2024) के प्रचार के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रमुख और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हेलीकॉप्टर को रोके जाने का मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। यह घटना उस समय सामने आई जब हेमंत सोरेन राज्य में अपने पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे थे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के निदेशक को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्हें इस घटना की पूरी जांच करने और 6 नवंबर तक वस्तुस्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है।

हेमंत सोरेन का हेलीकॉप्टर क्यों रोका गया?
हेमंत सोरेन के हेलीकॉप्टर को रोके जाने की घटना ने राज्य के चुनावी माहौल में तनाव बढ़ा दिया है। यह मामला तब सामने आया जब हेमंत सोरेन ने पार्टी प्रचार के लिए बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरने का प्रयास किया था। हालांकि, उनके हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने से रोक लिया गया। JMM ने इसे एक साजिश और चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप के रूप में देखा, जिससे उनके स्टार प्रचारक को एक तरह से चुनाव प्रचार में असमानता का सामना करना पड़ा।
चुनाव आयोग ने लिया मामला गंभीरता से
चुनाव आयोग ने इस मामले को तुरंत संज्ञान में लिया और बिरसा मुंडा एयरपोर्ट ऑथोरिटी के निदेशक से एक पत्र के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा, “इस घटना से किसी भी प्रकार की गलतफहमी या संचारहीनता को रोकने के लिए जांच की जानी चाहिए।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिलने चाहिए, और इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।
क्या था 23 अक्टूबर की बैठक का संदर्भ?
इस पत्र में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह भी उल्लेख किया कि 23 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें राजनीतिक दलों और एयरपोर्ट ऑथोरिटी के अधिकारियों ने वीआईपी मूवमेंट से संबंधित दिशा-निर्देशों पर चर्चा की थी। इस बैठक का उद्देश्य विधानसभा चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की असमानता को रोकना था, ताकि सभी राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके। बैठक में वीआईपी मूवमेंट के दिशा-निर्देशों को स्पष्ट किया गया था और राजनीतिक दलों को एयरपोर्ट ऑथोरिटी के अधिकारियों से संपर्क करने के लिए हेल्पलाइन नंबर भी दिए गए थे, ताकि कोई भी समस्या उत्पन्न होने पर त्वरित समाधान हो सके।
निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन जरूरी
भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान सभी प्रत्याशियों के लिए एकसमान अवसर सुनिश्चित करना अनिवार्य है। आयोग की ओर से राज्य में सभी राजनीतिक दलों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि कोई भी नेता या पार्टी पक्षपाती कार्रवाई का सामना न करे। इसके साथ ही किसी भी राजनीतिक दल को अपने चुनावी प्रचार में किसी प्रकार की असमानता का सामना नहीं करना चाहिए।
अब क्या होगा?
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एयरपोर्ट निदेशक से मामले की जांच करने और 6 नवंबर तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। इस स्थिति पर अब चुनाव आयोग की नजरें गड़ी हुई हैं और वे यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई भी पक्ष ऐसा न हो जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास करे। साथ ही, यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा तूल पकड़ सकता है, खासकर यदि किसी अन्य पार्टी या उम्मीदवार के प्रचार में इसी तरह की अड़चनें सामने आती हैं। चुनावी माहौल में इस प्रकार की घटनाओं से चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं, जिससे आयोग को अधिक सख्ती से काम करने की आवश्यकता हो सकती है।
Read Also- झारखंड BJP की बड़ी कार्रवाई, बगावत कर चुनाव लड़ रहे चार नेताओं को किया छह साल के लिए निष्कासित

