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केयू में प्रभारी रजिस्ट्रार की नियुक्ति को पूर्व रजिस्ट्रार जयंत शेखर ने कोर्ट में दी चुनौती, कहा विवि के सिंडिकेट ने उनके सेवा विस्तार पर लगायी थी मुहर, फिर किसी और को प्रभारी रजिस्ट्रार बनाना गलत

by Rakesh Pandey
Kolhan University
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जमशेदपुर: कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) में प्रभारी रजिस्ट्रार नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। विवि के पूर्व रजिस्ट्रार प्रोफेसर जयंत शेखर की ओर से इस मामले में केस दायर किया गया है। उन्होंने सिंडिकेट द्वारा उनका सेवा विस्तार किए जाने के बाद भी राजभवन की ओर से उनके सेवाविस्तार को स्वीकार नहीं करते हुए डॉ राजेंद्र भारती को प्रभारी रजिस्ट्रार बनाए जाने को गलत बताते हुए राजभवन के निर्णय को चुनौती दी गयी है। उन्होंने अपने पिटीशन में कहा है कि विश्वविद्यालय के सिंडिकेट को यह अधिकार है कि वह किसी भी पदाधिकारी को छह महीने का सेवा विस्तार दे सके। केयू के सिंडिकेट ने ऐसा करते हुए मेरे सेवा विस्तार पर मुहर लगायी थी, लेकिन इसके बाद भी राजभवन ने सिंडिकेट के फैसले को न मानते हुए डॉ राजेंद भारती को रजिस्ट्रार का प्रभार सौंपा, जो नियमत: गलत है।

यह है मामला:
कोल्हान विवि के रजिस्ट्रार प्रो जयंत शेखर का कार्यकाल 19 नवंबर को पूरा हुआ था। इससे पहले केयू के सिंडिकेट ने इसी साल फरवरी में उनके सेवा विस्तार से संबंधित प्रस्ताव को पारित करते हुए इसे मंजूरी के लिए राजभवन को भेज दिया था। ऐसे में कहा जा रहा था कि कार्यकाल पूरा होने के बाद भी प्रोफेसर जयंत शेखर ही रजिस्ट्रार बने रहेंगे। राजभवन ने सिंडिकेट के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। विवि से प्रभारी रजिस्ट्रार के लिए तीन नाम मांग लिया था। इसके बाद कोल्हान विवि ने तीन नाम भेजा था। इसमें से वरियता के आधार पर राजभवन ने डॉ राजेंद्र भारती को प्रभारी रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसके बाद ही प्रोफेसर जयंत शेखर कोर्ट पहुंच गये हैं।

कुलपति नियुक्ति का मामला भी है कोर्ट में, 30 को होगी सुनवाई:
विदित हो कि इससे पहले कोल्हान समेत राज्य के चार विवि में कुलपति नियुक्ति का मामला भी कोर्ट में है। इसकी वजह से कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। मिली जानकारी के अनुसार कुलपति नियुक्ति मामले में सुनवाई 30 नवंबर को हाईकोर्ट में होनी है। अगर कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया को सही बताया तो राजभवन कुलपतियों के नाम की घोषणा दिसंबर के पहले सप्ताह में कर देगा। क्योंकि नियुक्ति से संबंधित सभी प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है। अगर कोर्ट ने प्रक्रिया को गलत ठहराया तो नियुक्ति प्रक्रिया फिर से शुरू करनी होगी।

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