Garhwa : गढ़वा जिले के हसनदाग गांव में एक शादी समारोह में उस समय विवाद हो गया, जब सभी वैवाहिक रस्में पूरी होने के बाद दुल्हन पक्ष ने विदाई करने से इनकार कर दिया। मामला इतना बढ़ा कि दूल्हा और बारात में शामिल लोगों को करीब 12 घंटे तक गांव में ही बंधक बना लिया गया। बाद में सामाजिक पंचायत के हस्तक्षेप के बाद विवाद सुलझा और बारातियों को वापस जाने दिया गया।
गौरतलब है कि पलामू जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र स्थित सरहुआ गांव के रहने वाले धनंजय चौधरी की बारात हसनदाग गांव पहुंची थी। तय कार्यक्रम के अनुसार शादी की सभी रस्में, जिनमें सिंदूरदान भी शामिल था, संपन्न करा ली गईं। रात भर कार्यक्रम शांतिपूर्वक चलता रहा।
बताया जाता है कि अगली सुबह दुल्हन के परिजनों ने विदाई से साफ इनकार कर दिया। जब दूल्हे पक्ष ने इसका कारण पूछा तो दुल्हन पक्ष ने दूल्हे के दिव्यांग होने का आरोप लगाया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी बढ़ गई और दुल्हन पक्ष के लोगों ने दूल्हे समेत बारातियों को वहीं रोक लिया।
स्थिति तनावपूर्ण होने पर गांव के लोगों ने पहल की और सामाजिक पंचायत बुलाई गई। लंबी बातचीत के बाद यह तय हुआ कि शादी में हुए खर्च का आपसी बंटवारा किया जाएगा। दूल्हे पक्ष की ओर से दिया गया दहेज का सामान भी वापस कर दिया गया। समझौते के बाद बारातियों को मुक्त कर दिया गया और वे बिना दुल्हन के वापस लौट गए।
दूल्हे के पिता दिनेश चौधरी ने बताया कि यह विवाह पिछले साल अक्टूबर में तय हुआ था और सभी तैयारियां आपसी सहमति से की गई थीं। उन्होंने कहा कि शादी की सभी रस्में पूरी होने के बाद अचानक दिव्यांगता का मुद्दा उठाकर विदाई रोक दी गई, जिससे दोनों परिवारों को नुकसान उठाना पड़ा।
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