रांची : झारखंड के गढ़वा जिले की जमीन के नीचे छिपे संभावित परमाणु खजाने ने केंद्र सरकार का ध्यान खींचा है। यूरेनियम के संभावित भंडार की तलाश में केंद्र सरकार की प्रमुख एजेंसी परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (एएमडी) जिले में गहन वैज्ञानिक सर्वे और अन्वेषण कार्य कर रही है। प्रारंभिक संकेतों ने उम्मीदें बढ़ा दी हैं कि आने वाले समय में गढ़वा झारखंड के परमाणु खनिज मानचित्र में एक महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है।
पूर्वी सिंहभूम के बाद गढ़वा पर फोकस
अब तक झारखंड में यूरेनियम खनन और अन्वेषण का केंद्र पूर्वी सिंहभूम जिला रहा है, जहां जादूगोड़ा, नरवा पहाड़ और बांदुहुड़ांग जैसे क्षेत्रों में पहले से गतिविधियां चल रही हैं। अब गढ़वा जिले में संभावनाएं सामने आने के बाद राज्य में यूरेनियम संसाधनों के विस्तार की संभावना प्रबल हो गई है। इससे भारत के बढ़ते परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को स्वदेशी यूरेनियम की आपूर्ति में मजबूती मिल सकती है।
कई चरणों में हो रही है खोज
यूरेनियम अन्वेषण की प्रक्रिया जटिल और बहुस्तरीय होती है। पहले चरण में रीजनल सर्वे (जी-4) के तहत बड़े भू-भाग में भूवैज्ञानिक मानचित्रण और नमूनों का अध्ययन किया जाता है। इसके बाद प्रारंभिक अन्वेषण (जी-3) में ड्रिलिंग के माध्यम से यूरेनियम की मौजूदगी की पुष्टि की जाती है। यदि परिणाम सकारात्मक होते हैं, तो सामान्य अन्वेषण (जी-2) के तहत और अधिक गहराई में ड्रिलिंग कर खनिज भंडार के आकार और गुणवत्ता का अनुमान लगाया जाता है।
इन इलाकों में चल रहा है सर्वे
प्राप्त जानकारी के अनुसार गढ़वा जिले के रंका प्रखंड के चुटी, भागोदेह, जिरुआ और उंटारी रोड प्रखंड के करकटे क्षेत्र में अन्वेषण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों की टीम भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, नमूनाकरण और ड्रिलिंग के जरिए संभावित भंडारों का वैज्ञानिक आकलन कर रही है।
पांच वर्षीय कार्य योजना के तहत अभियान
यह पूरा कार्य एएमडी की वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक की पांच वर्षीय कार्य योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य संभावित यूरेनियम क्षेत्रों की पहचान करना, उनकी मात्रा और गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है। अन्वेषण कार्य को तकनीकी मानकों और सख्त सुरक्षा नियमों के तहत अंजाम दिया जा रहा है।
भविष्य की बड़ी परियोजनाओं की आहट
फिलहाल गढ़वा जिले में यूरेनियम खनन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चल रहा अन्वेषण भविष्य की बड़ी परियोजनाओं की ओर इशारा कर रहा है। यदि अंतिम चरणों में परिणाम आर्थिक रूप से व्यवहार्य पाए जाते हैं, तो एएमडी अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके बाद खनन पट्टा देने और वैधानिक प्रक्रियाएं शुरू की जा सकती हैं। इससे न केवल गढ़वा, बल्कि पूरे झारखंड और देश की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
गढ़वा की धरती में छिपा परमाणु खजाना! यूरेनियम की तलाश में केंद्र सरकार
रांची : झारखंड के गढ़वा जिले की जमीन के नीचे छिपे संभावित परमाणु खजाने ने केंद्र सरकार का ध्यान खींचा है। यूरेनियम के संभावित भंडार की तलाश में केंद्र सरकार की प्रमुख एजेंसी परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (एएमडी) जिले में गहन वैज्ञानिक सर्वे और अन्वेषण कार्य कर रही है। प्रारंभिक संकेतों ने उम्मीदें बढ़ा दी हैं कि आने वाले समय में गढ़वा झारखंड के परमाणु खनिज मानचित्र में एक महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है।
पूर्वी सिंहभूम के बाद गढ़वा पर फोकस
अब तक झारखंड में यूरेनियम खनन और अन्वेषण का केंद्र पूर्वी सिंहभूम जिला रहा है, जहां जादूगोड़ा, नरवा पहाड़ और बांदुहुड़ांग जैसे क्षेत्रों में पहले से गतिविधियां चल रही हैं। अब गढ़वा जिले में संभावनाएं सामने आने के बाद राज्य में यूरेनियम संसाधनों के विस्तार की संभावना प्रबल हो गई है। इससे भारत के बढ़ते परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को स्वदेशी यूरेनियम की आपूर्ति में मजबूती मिल सकती है।
कई चरणों में हो रही है खोज
यूरेनियम अन्वेषण की प्रक्रिया जटिल और बहुस्तरीय होती है। पहले चरण में रीजनल सर्वे (जी-4) के तहत बड़े भू-भाग में भूवैज्ञानिक मानचित्रण और नमूनों का अध्ययन किया जाता है। इसके बाद प्रारंभिक अन्वेषण (जी-3) में ड्रिलिंग के माध्यम से यूरेनियम की मौजूदगी की पुष्टि की जाती है। यदि परिणाम सकारात्मक होते हैं, तो सामान्य अन्वेषण (जी-2) के तहत और अधिक गहराई में ड्रिलिंग कर खनिज भंडार के आकार और गुणवत्ता का अनुमान लगाया जाता है।
इन इलाकों में चल रहा है सर्वे
प्राप्त जानकारी के अनुसार गढ़वा जिले के रंका प्रखंड के चुटी, भागोदेह, जिरुआ और उंटारी रोड प्रखंड के करकटे क्षेत्र में अन्वेषण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों की टीम भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, नमूनाकरण और ड्रिलिंग के जरिए संभावित भंडारों का वैज्ञानिक आकलन कर रही है।
पांच वर्षीय कार्य योजना के तहत अभियान
यह पूरा कार्य एएमडी की वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक की पांच वर्षीय कार्य योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य संभावित यूरेनियम क्षेत्रों की पहचान करना, उनकी मात्रा और गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है। अन्वेषण कार्य को तकनीकी मानकों और सख्त सुरक्षा नियमों के तहत अंजाम दिया जा रहा है।
भविष्य की बड़ी परियोजनाओं की आहट
फिलहाल गढ़वा जिले में यूरेनियम खनन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चल रहा अन्वेषण भविष्य की बड़ी परियोजनाओं की ओर इशारा कर रहा है। यदि अंतिम चरणों में परिणाम आर्थिक रूप से व्यवहार्य पाए जाते हैं, तो एएमडी अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके बाद खनन पट्टा देने और वैधानिक प्रक्रियाएं शुरू की जा सकती हैं। इससे न केवल गढ़वा, बल्कि पूरे झारखंड और देश की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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