घाटशिला: पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने और पेसा कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग को लेकर माझी पारगना माहाल के अगुवाओं ने मंगलवार को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन देश परगना बाबा बैजू मुर्मू के नेतृत्व में दिया गया। ज्ञापन में बताया गया कि पेसा नियमावली 2 जनवरी को राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद झारखंड के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में लागू किया जा चुका है। इसके बावजूद गांव स्तर पर इसकी प्रक्रिया अभी पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई है।
अगुवाओं ने मांग की कि पेसा नियमावली के अध्याय-2 के तहत ग्राम सभा के सीमांकन, सत्यापन और प्रकाशन की जिम्मेदारी उपायुक्त की है, इसलिए इस प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए। साथ ही प्रखंड स्तर पर बनने वाली टीम में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियों जैसे परगना बाबा, मानकी बाबा, हातु मुंडा और माझी बाबाओं को शामिल करना सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम सभा की अध्यक्षता केवल अनुसूचित जनजाति के पारंपरिक प्रतिनिधि ही करें, जैसा कि नियमावली के अध्याय-3, धारा-7 में उल्लेखित है। गैर आदिवासी ग्राम प्रधानों द्वारा ग्राम सभा की अध्यक्षता पर रोक लगाने की मांग भी की गई। ज्ञापन में यह सुझाव दिया गया कि पेसा नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पारंपरिक अगुवाओं को प्रशिक्षक बनाया जाए, ताकि वे स्थानीय भाषा में लोगों को प्रशिक्षण दे सकें और ग्राम सभा का संचालन सुचारू रूप से हो सके।
इसके अलावा पंचायत राज विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप प्रखंड स्तर पर संबंधित अधिकारियों और पारंपरिक प्रतिनिधियों को आवश्यक आदेश जारी करने की भी मांग की गई। बताया गया कि ग्राम सभा के आयोजन के लिए 25 अप्रैल 2026 तक का समय निर्धारित किया गया है, लेकिन उससे पहले नियमावली के अनुसार सीमांकन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
प्रतिनिधिमंडल में माझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू, दीपक मुर्मू, पद्मावती हेंब्रोम, बिंदु सोरेन, कारु मुर्मू, मर्शाल मुर्मू, यादव टुडू, डेमका सोय और सुनील मुर्मू सहित कई लोग शामिल थे।
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