Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले में शुक्रवार को गुडफ्राइडे का पर्व गहरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुबह में चाईबासा, जगन्नाथपुर व चक्रधरपुर अनुमंडल के चर्च में सामुदायिक प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। चक्रधरपुर के ख्रीस्त राजा चर्च पोटका, लाल गिरजाघर, जीईएल चर्च सहित ग्रामीण क्षेत्र में प्रार्थना सभाएं हुईं। दोपहर 3 बजे सेंट जेवियर्स इंग्लिश स्कूल परिसर में प्रभु यीशु के क्रूस मरण एवं पवित्र क्रूस की विशेष उपासना की गई। इस दौरान आकर्षक झांकी निकाली गई, जिसमें प्रभु यीशु के क्रूस के मार्ग की 14 अवस्थाओं का जीवंत मंचन किया गया।
नाटक के माध्यम से यह दर्शाया गया कि किस प्रकार प्रभु यीशु को प्राणदंड के लिए क्रूस उठाकर ले जाया गया और अंततः उन्हें सूली पर चढ़ाया गया। मंचन में दिखाया गया कि कैसे यीशु मसीह तीन बार गिरते हैं, बेरोनिका उनके चेहरे को पोंछती है, वे अपनी दुखी माता से मिलते हैं और अंततः क्रूस पर अपने प्राण त्याग देते हैं। सिपाहियों द्वारा उनके वस्त्र उतारने सहित पूरे घटनाक्रम को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान बाइबल पाठ और स्तुति-गान भी हुआ। इसके पश्चात अतिथि पुरोहित फादर जेरी एवं फादर हेनरी, चक्रधरपुर के पल्ली पुरोहित फादर पौलुस बोदरा तथा फादर एस. पुथुमय राज द्वारा पुण्य शुक्रवार का विशेष मिस्सा संपन्न कराया गया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में कैथोलिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। साथ ही सेंट एंजेला अस्पताल, कारमेल स्कूल और ज़ेवियर भवन की सिस्टर्स सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
क्यों मनाया जाता है गुड फ्राइडे
ईसाई धर्म के अनुसार, गुड फ्राइडे के दिन प्रभु यीशु मसीह ने मानवता के उद्धार के लिए क्रूस पर अपने प्राण त्याग दिए थे। इसके दो दिन बाद रविवार को उनके पुनर्जीवित होने की घटना को ईस्टर संडे के रूप में मनाया जाता है। ईसाई समुदाय का विश्वास है कि यीशु मसीह की तरह ही एक दिन सभी को नया जीवन प्राप्त होगा और वे कष्टों से मुक्ति पाएंगे।

