गोरखपुर : रामगढ़ताल के किनारे मोहद्दीपुर से सहारा एस्टेट तक निर्माणाधीन रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर शनिवार को काश्तकारों ने गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल थे। काश्तकारों ने जीडीए से मांग की कि रिंग रोड के लिए भूमि का अधिग्रहण सर्किल रेट से दोगुनी दर पर किया जाए, क्योंकि वर्तमान में जो दर निर्धारित की गई है, वह बहुत कम है।
प्रदर्शन में काश्तकारों की प्रमुख मांगें
रामगढ़ताल के प्रभावित काश्तकारों ने पूर्व पार्षद प्रतिनिधि राघवेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में बैठक की और फैसला लिया कि जीडीए द्वारा निर्धारित दर पर भूमि का अधिग्रहण नहीं होने देंगे। काश्तकारों का कहना था कि क्षेत्र का वर्तमान सर्किल रेट 1260 रुपये प्रति वर्ग फीट है और उन्हें इसके दोगुने मुआवजे का हक मिलना चाहिए। काश्तकारों ने यह भी आरोप लगाया कि जीडीए और प्रशासन मुख्यमंत्री को भी गुमराह कर रहे हैं और जो भूमि बंधे के किनारे आ रही है, उसके लिए उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है।
जीडीए से आश्वासन, प्रशासन से संवाद का वादा
प्रदर्शन की सूचना मिलने पर जीडीए के अधिशासी अभियंता नरेंद्र कुमार और सहायक अभियंता एके तायल मौके पर पहुंचे और काश्तकारों से बैठक की। उन्होंने काश्तकारों की मांगों को सुना और आश्वस्त किया कि वे इस मामले को प्रशासन से उठाकर समाधान निकालेंगे। काश्तकारों ने कहा कि उनका विरोध विकास कार्य के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनका उद्देश्य प्रभावित किसानों को उनका उचित हक दिलवाना है।
कृषि भूमि के प्रभावित काश्तकारों में गुस्सा
विरोध प्रदर्शन में रेनू सिंह, सर्वेश पांडे, रामप्रवेश पाठक, विनोद यादव, विशाल चंद, अंजलि चंद, अरविंद कुमार, रिंकू कुमार, सुरेंद्र यादव और अन्य कई काश्तकार शामिल थे। इन सभी का कहना था कि यदि उचित मुआवजा नहीं मिलेगा तो वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
गीडा से उद्यमियों को राहत, गड्ढे वाले प्लाट पर मिट्टी भरने का फैसला
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) ने उद्यमियों के लिए राहत की घोषणा की है। गड्ढे वाले प्लाटों को अब मिट्टी भरकर दिया जाएगा, ताकि औद्योगिक इकाइयों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। इस निर्णय से उन उद्यमियों को मदद मिलेगी जिन्होंने गड्ढे वाले प्लाटों के कारण परेशानी उठाई थी। चेंबर आफ इंडस्ट्रीज ने भी इस मुद्दे को कई मंचों पर उठाया था और अब गीडा ने इस पर कार्रवाई करते हुए गड्ढों वाले प्लाटों पर मिट्टी भरने का निर्णय लिया है।
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