नई दिल्ली : केंद्र सरकार अब एक नया नियम बनाने जा रही है, जिसका उद्देश्य जांच एजेंसियों को डिजिटल और कागजी दस्तावेजों को जब्त करने और उनका संचालन करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करना है। इस नए नियम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जांच एजेंसी किसी की निजी जानकारी, जैसे पर्सनल चैट या अन्य व्यक्तिगत डाटा, को बिना किसी ठोस वजह के जब्त न करे। यह नियम खासकर उन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है जब जांच एजेंसियां कई बार जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज जब्त कर लेती हैं जिनका जांच से कोई संबंध नहीं होता, और इनमें अक्सर लोगों की व्यक्तिगत जानकारी भी शामिल होती है।

निजता का उल्लंघन रोकने के लिए कदम
यह नियम बनाने का उद्देश्य जांच के दौरान नागरिकों की निजता का उल्लंघन रोकना है, क्योंकि पहले कई बार ऐसा हुआ है कि एजेंसियां किसी मामले की जांच करते हुए डिजिटल दस्तावेज़, जैसे मोबाइल फोन और लैपटॉप, जब्त कर लेती हैं, जिनमें कई बार प्राइवेट चैट, व्यक्तिगत तस्वीरें या अन्य संवेदनशील जानकारी भी होती है। इस तरह की कार्रवाई से लोगों की निजी स्वतंत्रता का हनन होता है, जो न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर मुद्दा बन सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
इस मुद्दे को लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण मामला सुनवाई के लिए आया। सुप्रीम कोर्ट ने लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन के आईफोन से सभी डिजिटल रिकॉर्ड्स की रिकवरी पर रोक लगा दी थी। ईडी (इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट) ने मार्टिन के आईफोन के साथ-साथ 12 करोड़ रुपये की नकदी भी जब्त की थी। इसके बाद मार्टिन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और जांच एजेंसी को उनके डिजिटल रिकॉर्ड्स जब्त करने से रोकने की मांग की।
व्यक्तिगत जानकारी जब्त करना निजता के अधिकार का उल्लंघन
मार्टिन का कहना था कि उनके आईफोन में पर्सनल चैट्स और अन्य डेटा हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित नहीं हैं। उनका यह तर्क था कि इन व्यक्तिगत जानकारी को जब्त करना उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए यह आदेश दिया कि उनकी पर्सनल चैट्स को तब तक जब्त न किया जाए जब तक कि जांच से संबंधित कोई स्पष्ट आधार न हो।
नया दिशानिर्देश: सरकार का कदम
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई राहत के बाद, सरकार ने जांच एजेंसियों के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्णय लिया है। सरकार की योजना है कि वह एक ऐसा कानून बनाए, जो यह स्पष्ट करे कि जब एजेंसियां किसी से डिजिटल या कागजी दस्तावेज़ जब्त करती हैं, तो उन्हें किस प्रकार से संभालना चाहिए। खासकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जांच से अप्रासंगिक व्यक्तिगत जानकारी या पर्सनल चैट्स को जब्त करना या उनका इस्तेमाल करना गलत न हो।
अगली सुनवाई 6 जनवरी को
सुप्रीम कोर्ट में अब इस मुद्दे की अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी, जब अमेज़न द्वारा दायर एक मामले की सुनवाई भी होगी। इस दौरान सरकार की ओर से डिजिटल और अन्य रिकॉर्ड्स की जब्ती के संबंध में दिशा-निर्देश तैयार करने की प्रक्रिया का खुलासा हो सकता है। सरकार की यह पहल यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि किसी भी व्यक्ति की पर्सनल जानकारी की रक्षा हो और जांच एजेंसियों द्वारा किसी भी प्रकार की अनावश्यक छेड़छाड़ से बचा जा सके। यह कदम नागरिकों के निजता अधिकारों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निजता और सुरक्षा का संतुलन
इस तरह के नए दिशा-निर्देशों के लागू होने से यह उम्मीद जताई जा रही है कि जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त अधिकार होंगे, लेकिन वे इसे किसी की निजता के उल्लंघन के रूप में नहीं इस्तेमाल कर सकेंगी। यह दिशा-निर्देश यह सुनिश्चित करेगा कि सरकार और जांच एजेंसियां किसी के व्यक्तिगत जीवन में हस्तक्षेप किए बिना, केवल उस जानकारी को जब्त करें जो सीधे तौर पर जांच से संबंधित हो।
निजता को लेकर लोगों का बढ़ेगा विश्वास
इस नियम के लागू होने के बाद, जांच एजेंसियों को जांच के दौरान कोई भी डिजिटल या कागजी दस्तावेज़ जब्त करते समय साफ-साफ यह तय करना होगा कि किस जानकारी का क्या इस्तेमाल किया जाएगा और किसे छोड़ दिया जाएगा। इससे नागरिकों को यह विश्वास मिलेगा कि उनकी निजी जानकारी की सुरक्षा की जा रही है और जांच एजेंसियां बिना किसी व्यक्तिगत नुक्सान के अपने कर्तव्यों का पालन कर रही हैं।
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