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हटिया के विस्थापित करेंगे विधानसभा का घेराव, रोजगार व अधिकार के लिए आंदोलन तेज करने का ऐलान

कोर कैपिटल में सभी संस्थानों में भी होगी घेराबंदी, गांव-गांव चलाएंगे अभियान

by Vivek Sharma
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Ranchi (Jharkhand) : हटिया विस्थापित परिवार समिति ने अपने हक और अधिकारों की लड़ाई को तेज करने का एलान कर दिया है। रविवार को कुटे में आयोजित बैठक में समिति ने फैसला लिया कि आगामी मानसून सत्र के दौरान झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष पंकज शाहदेव ने कहा कि यह आंदोलन अब आर-पार की लड़ाई होगी।

क्रमबद्ध आंदोलन की घोषणा

बैठक में निर्णय लिया गया कि आंदोलन केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहेगा। इसके दूसरे चरण में कोर कैपिटल क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी संस्थानों की घेराबंदी की जाएगी। पंकज शाहदेव ने कहा, “बिना संघर्ष के अधिकार नहीं मिलता। हमें अपनी जमीन के बदले न्याय चाहिए, न कि छलावा।”

हर गांव में चलाया जाएगा अभियान

विस्थापितों की समिति अब गांव-गांव जाकर बैठक करेगी। हर घर तक आंदोलन का संदेश पहुंचाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस आंदोलन से जुड़ें। तरुण शाहदेव, विजय सिंह, प्रमोद सिंह, भाई त्रिपाठी, कालीचरण लोहार, बीजू महतो, विनोद सिंह, मनोज पाठक, रोहित पांडे समेत कई वक्ताओं ने भी आंदोलन की रूपरेखा पर विचार रखे।

रोजगार को लेकर भी होगी कार्रवाई

समिति के महासचिव और झामुमो नेता कलाम आजाद ने कहा कि विस्थापितों के अधिकार की अनदेखी अब नहीं होगी। उन्होंने कहा, “आईआईएम, गेल इंडिया और कोर कैपिटल में स्थापित सभी संस्थानों को यह स्पष्ट करना होगा कि स्थानीय विस्थापितों को रोजगार देना उनकी जिम्मेदारी है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।”

एचईसी कर्मियों को भी मिला समर्थन

बैठक में उपस्थित लोगों ने एचईसी सप्लाई कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय की भी कड़ी आलोचना की और उनके आंदोलन को पूरा समर्थन देने का एलान किया।

आंदोलन में जुटे कई संगठन और प्रतिनिधि

बैठक में समिति के सचिव महावीर मुंडा, प्रसन्न पांडे, बुधराज सिंह, राजेश्वर यादव, जयप्रकाश साहू, किशोर नाथ शाहदेव, अनिल महतो, मनोज बैठा समेत कई नेताओं और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने अपनी सहभागिता दी।

जमीन के बदले रोजगार नहीं मिलने तक आंदोलन

हटिया विस्थापितों ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें उनकी जमीन के बदले रोजगार और हक नहीं मिलेगा, वे चुप नहीं बैठेंगे। माना जा रहा है कि राजधानी रांची में यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।

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