
चाईबासा : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में खदान इलाके के लोगों के दुख दर्द को समझते हुए डीएमएफटी फंड बनाया। इसका अध्यक्ष पश्चिम सिंहभूम के उपायुक्त को बनाया गया, ताकि डिस्ट्रिक्ट फंड में ही पैसा जमा हो। उस फंड से प्रभावित इलाकों में विकास का काम हो। लेकिन ऐसा कहीं देखने को नहीं मिला। पड़ोसी राज्य ओडिशा चमक रहा है। लेकिन यहां हेमंत सोरेन की सरकार अपनी तिजोरी भरने के लिए झारखंड को बर्बाद कर दिया है।
यह बातें अपने तीन दिवसीय दौरे पर चाईबासा पहुंचे नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने प्रेस वार्ता कर पत्रकारों से कही। उन्होंने कहा कि उन्होंने तीन दिनों तक इस क्षेत्र का दौरा किया, लेकिन विकास का काम कहीं दिखाई नहीं दिया। 2015 में जब कानून बना है तो अब तक चाईबासा जिला को कितना पैसा मिला होगा। जब इसकी जानकारी हासिल की गई तो पता चला कि कुल मिलाकर 10 वर्षों में 3742.15 करोड़ रुपए का फंड आया। देखा जाए तो प्रत्येक वर्ष चाईबासा को 300 करोड़ से ज्यादा का फंड मिला। लेकिन खर्च आया कहां ? और खर्च में 75.68 प्रतिशत यूटिलाइजेशन बताया गया।
काम कहीं हुआ नहीं, वहां पैसा लुटाना एक प्रकार से हेमंत सरकार का आर्थिक क्राइम
पहली प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल, गुणवत्ता शिक्षा, स्वास्थ्य की सुविधा, सड़क व बिजली व्यवस्था उपलब्ध कराना था। यह काम कहीं नहीं हुआ। लेकिन हेमंत सोरेन की सरकार वहां पैसा लुटा दिए। एक प्रकार से हेमंत सोरेन की सरकार ने आर्थिक क्राइम किया है। सरकार को इसे पोर्टल में डाल देना चाहिए, ताकि जनता को पता चल सके लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस तरह से पैसों का दुरुपयोग किया जाना आर्थिक क्राइम है। यहां के लोग रोजगार की तलाश में झारखंड से बाहर जा रहे हैं। बच्चों का ट्रैफिकिंग हो रही है। साढ़े छह वर्षों से हेमंत सोरेन की सरकार है। लेकिन आज यह यहां गरीबी और बेरोजगारी है। उसे गरीबों के लिए हेमंत सोरेन की सरकार जिम्मेदार है। आधा दर्जन से अधिक खदानें जिसकी लीज समाप्त हो गई है। राज्य सरकार ने उसे नीलामी तक नहीं करा पाई। नीलामी हुई होती तो इसमें राजस्व मिलता डीएमएफटी फंड में भी पैसा आता और इस क्षेत्र का विकास होता।
6 वर्षों तक राज करने के बाद भी कोई खदानों की नीलामी नहीं करा पाई हेमंत सरकार
6 वर्षों तक राज करने के बाद भी कोई खदानों की नीलामी नहीं की। देश में 1920 से अबतक 434 खदानों की नीलामी हुई। उसमें से झारखंड में मात्र तीन खदानों का ही नीलामी हुई। लेकिन उसमें झारखंड सरकार ने नहीं बल्कि केंद्र सरकार ने नीलामी कराई है। चूंकि सभी कॉल ब्लॉक है। झारखंड सरकार ने एक भी आयरन ओर, पत्थर या बालू घाटों का नीलामी नहीं की। यही कारण कि यहां के लोग लोगों को रोजगार की तलाश में पलायन करना पड़ रहा है।
पड़ोसी राज्य ओडिशा में 45 कॉल और नन कॉल खदानों की नीलामी हुई
मजेदार बात यह है कि पड़ोसी राज्य उड़ीसा में 45 कॉल और नान कॉल खदानों की नीलामी हुई। उसमें अधिकांश आयरन ओर की खदाने हैं। जैसे-जैसे खत्म हुई नीलामी की इससे उड़ीसा को फायदा हुआ है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में झारखंड को 22000 करोड़ रूपया रॉयल्टी प्राप्त हुआ है। बगल में उड़ीसा को 46000 करोड रुपए (झारखंड से दो गुना से भी अधिक) रुपया मिला है। पड़ोसी राज्य उड़ीसा चमक रहा है। लेकिन यहां हेमंत सोरेन की सरकार अपनी तिजोरी भरने के लिए झारखंड को बर्बाद कर दिया है। झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार खूब देश-विदेश घूम रही है, बड़े-बड़े एमओयू करते हैं, लेकिन जमीन में कुछ देखने को नहीं मिल रहा है। यहां की जो गरीबी और बेरोजगारी है वह सिर्फ और सिर्फ हेमंत सोरेन सरकार जिम्मेदार है। समस्या तो आते जाते रहती है। झींकपानी एससीसी कंपनी बंद होने जा रही है। हेमंत सोरेन की सरकार को कंपनी प्रबंधन से बात कर समस्या का समाधान करने चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं किया। इससे पहले भी ऐसी समस्याएं उत्पन्न हुई थी। लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार ने पहल कर समस्या का समाधान किया था। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व विधायक शशि भूषण सामड, जेबी तुबिद, भूषण पाटपिंगुवा अन्य उपस्थित थे।

