स्पेशल डेस्क: भारतीय न्याय संहिता में हुए महत्वपूर्ण संशोधनों ने Hit And Run केसों से जुड़े नियमों में बड़ा परिवर्तन किया है। राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी प्राप्त होने के बाद सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति में गाड़ी चालकों पर लागू होने वाली सजा और जुर्माने में बदलाव का नियम लागू हो जाएगा। इस नए कानून के साथ जुड़े विवाद और चर्चाएं देशभर में चरम पर हैं। इससे जुड़े प्रश्नों का उत्तर लोग तलाश रहे हैं। आइए जानते हैं कि क्यों मचा हुआ है इतना बवाल।
1 अप्रैल से लागू होगा नया कानून
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति मिलने के बाद भारतीय न्याय संहिता में नए प्रावधानों को लागू किया जा रहा है। बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति मिलने के बाद Bharatiya Nyaya Sanhita 2023 अब कानून बन चुका है। हालांकि अभी यह लागू नहीं है। एक अप्रैल से इसके नियम लागू होंगे। इसके साथ ही Hit And Run के मामलों में भारतीय न्याय संहिता के हिसाब से प्रावधानों को लागू किया जाएगा। इसी नए प्रावधानों को लेकर भारत में व्यापक विरोध हो रहे हैं।
Hit And Run के विरोध में राज्यों में हलचल
Hit And Run के विरोध में कई राज्यों में, खासकर ट्रक चालकों के बीच इस नए कानून के खिलाफ धरना, हड़ताल और चक्का जाम की खबरें आ रही हैं। इससे उत्पन्न हुई अराजकता और पुलिस द्वारा हल्के बल का प्रयोग करने की भी आलोचना हो रही है। इस बवाल में, हमें यह जानना है कि नए कानून में ऐसा क्या है। पुराना कानून कैसा था। नए प्रावधानों के खिलाफ विरोध क्यों हो रहा है। ट्रक चालकों का विरोध कितना उचित है।
क्या है Hit And Run :
Hit And Run, जिसे हिंदी में “टक्कर मारकर भाग जाने” के शब्दार्थ से समझा जा सकता है। यह एक सड़क दुर्घटना का एक ऐसा मामला है जिसमें गाड़ी का चालक, अपनी गाड़ी को टक्कर मारने के बाद मौके से फरार हो जाता है। इसका अर्थ है कि जब किसी किसी को गाड़ी से टक्कर लगती है और उसके पश्चात गाड़ी चालक या यात्री मौके से भाग जाते हैं बिना किसी सहायता या सूचना के, तो उसे “Hit And Run” कहा जाता है। यह सामाजिक और कानूनी दृष्टि से एक गंभीर अपराध माना जाता है, जिससे कीमती जिंदगियों का नुकसान होता है।
क्या कहता है नया Hit And Run का नया नियम
Hit And Run के नए नियम ने तय किया है कि अगर सड़क दुर्घटना में किसी की मौत हो जाती है और गाड़ी चालक मौके से फरार होता है, तो उसे 10 साल की जेल हो सकती है और जुर्माना भी देना पड़ेगा। इसी नियम को लेकर ट्रक ड्राइवरों का विरोध है, और कई राज्यों में हड़ताल और चक्काजाम किया जा रहा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, और अन्य कई राज्यों में चालकों की आंदोलन का सिलसिला देखा जा रहा है।
ड्राइवरों का समर्थन और सरकारी आंकड़े
Hit And Run के नए कानून के वजह से देश के अलग-अलग शहरों में लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। ट्रक ड्राइवरों का कहना है कि नया कानून अत्यधिक कठोर है। उन्हें नये प्रावधानों का सामना करना मुश्किल हो रहा है। ड्राइवरों ने तर्क देते हुए कहा है कि टक्कर के बाद अगर वे भागते हैं तो उन्हें नए कानून के तहत सख्त सजा मिलेगी और अगर वे रुकते हैं तो मौके पर मौजूद भीड़ उन पर हमला कर सकती है।
कई बार ऐसा देखा गया है की भीड़ सिर्फ मार पिटाई पर ही नहीं रुकती बल्कि यह मॉब लिंचिंग का रूप ले लेती है। इस नियम के खिलाफ और ट्रक संचालकों के समर्थन में आंदोलन तेज हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, Hit And Run मामलों में हर साल लगभग 50,000 लोगों की मौत हो रही है। नए कानून का उद्देश्य इस गंभीर समस्या का समाधान करना है।
Hit And Run – ड्राइवरों के आरोप और सरकार का पक्ष
हालांकि नये नियम में ड्राइवरों को कुछ मामलों में राहत भी मिलेगी, इसके बावजूद उनका कहना है कि नए कानून बहुत अधिक सख्त है और इसे नरम किया जाना चाहिए। नए नियम के अनुसार, अगर गाड़ी से टकराने वाला शख्स गलत तरीके से सड़क को पार करता है या गाड़ी के सामने आ जाता है, तो ड्राइवर को अधिकतम पांच साल की सजा और जुर्माना भरना पड़ेगा। लेकिन अगर टक्कर गलत ढंग से होती है तो ड्राइवर को 10 साल जेल की सजा काटनी होगी।
नये कानून के सामाजिक परिणाम:
इसी कड़ी में, नए कानून का सामाजिक परिणाम किस प्रकार आएगा, इस पर सरकार, वकील, और आम जनता के बीच विचार-विमर्श का सिलसिला अभी चल ही रहा है। Hit And Run के कानून में किए गए बदलाव की सही या गलती का आलोचनात्मक मूल्यांकन भी किया जा रहा है।
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