सना : यमनी प्रतिरोध आंदोलन अंसारुल्लाह के नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने सीरिया के पश्चिमी तटीय क्षेत्र में हालिया घातक हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए इसे अरब देशों के लिए एक सबक और अपराधियों व उनके संरक्षकों के लिए एक गंभीर खतरा बताया।
हूती ने यह बयान रमजान के नौवें दिन एक टेलीविज़न संबोधन में दिया, जो यमनी राजधानी सना से प्रसारित हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे अपराधों के परिणाम उनके लिए गंभीर होंगे, खासकर उन तकफीरी आतंकवादियों के लिए और उनके समर्थकों के लिए जो अमेरिकी और कुछ यूरोपीय देशों की सुरक्षा में खुद को सुरक्षित समझते हैं।
सीरिया के सामाजिक ताने बाने को तोड़ने की साजिश
अंसारुल्लाह नेता ने सीरिया में तकफीरी समूहों द्वारा किए जा रहे अपराधों को “भयावह” बताया और कहा कि इनकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग अभी भी इंसानियत और नैतिकता रखते हैं, उन्हें इन अपराधों को रोकने की कोशिश करनी चाहिए। हूती ने कहा कि तकफीरी आतंकवादी सीरिया के निर्दोष नागरिकों के खिलाफ नरसंहार कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो आ रहे हैं वह उनके अपराध और दरिंदगी को उजागर करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीरिया में तकफीरी समूह अमेरिका और इस्राइल के हितों की सेवा कर रहे हैं और सीरिया के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ रहे हैं।
द्रज व कुर्द समुदाय को इसराइल की सुरक्षा
हूती ने इस बात की ओर इशारा किया कि इस्राइल ने सीरिया के स्वेइदा प्रांत में द्रूज़ समुदाय की सुरक्षा की घोषणा की है, और तकफीरी समूह उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाते और उनका सम्मान करते हैं। “अमेरिकी उत्तरी सीरिया में कुर्दों को सुरक्षा देने का दावा करते हैं, उन्हें हथियार देते हैं। आतंकी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाते। जबकि बाकी सीरियाई समाज को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे न तो अमेरिकी सुरक्षा में हैं और न ही इस्राइली संरक्षा में,” हूती ने कहा।
इसी के लिए तैयार किए गए हैं अलकायदा व आइएसआइएस
उन्होंने कहा कि सीरिया के नागरिकों की निर्मम हत्या हो रही है। अमरीका और यूरोपीय देश चुप हैं। इसके गंभीर परिणाम होंगे। हूती ने इस हिंसा को अमेरिकी-इस्राइली साजिश बताते हुए कहा कि अलकायदा व आइएसआइएस के आतंकी तकफीरी समूह इन्हीं देशों ने बनाए हैं और इन्हें इसी भूमिका के लिए तैयार किया गया है। अंसारुल्लाह के नेता ने इस बात पर जोर दिया कि तकफीरी इस्लाम की छवि को खराब करने की साजिश कर रहे हैं। “अगर ये लोग मुसलमान होते, तो वे इस्राइली से मुकाबला करते।
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