Ranchi : झारखंड के चर्चित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से सशक्त जमानत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है। जांच में सहयोग करने की शर्त पर उन्हें यह बेल दी गई है।
बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बीवी नागरथना और उज्जवल भुइयां की पीठ ने जमानत याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान विनय चौबे की तरफ से दलील दी गई कि इस मामले में विजय प्रताप सिंह और सुधीर कुमार सिंह को जमानत पहले दी जा चुकी है। दोनों ही इस मामले में लाभार्थी हैं। इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह जमानत दी है। विनय चौबे की तरफ से यह भी दलील दी गई कि मामला साल 2009-10 का है। उस वक्त वह जिले में उपायुक्त थे। वह जमीन के इस मामले में 7 महीने से जेल में हैं। राज्य सरकार की तरफ से यह कहा गया कि विनय चौबे इस मामले में अभियुक्त हैं।
एसीबी ने 20 मई 2025 को तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे को गिरफ्तार किया था और उन पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर उत्पादन नीति 2022 के तहत मैनपॉवर सप्लाई करने वाली कंपनियों को फर्जी गारंटी के आधार पर काम करने दिया।
इससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ। साल 2025 में आइएएस विनय चौबे को गिरफ्तार किया गया था। तब से वह लगातार जेल में है। शराब घोटाले में गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। हजारीबाग में जमीन घोटाले में भी उनके खिलाफ दो मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है। एक मामला खास महल जमीन और एक मामला वन विभाग से जुड़ा हुआ है। वन भूमि में गड़बड़ी से संबंधित मामला है।
दोनों मामलों में विनय चौबे पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने उपायुक्त हजारीबाग के रूप में कार्यरत रहते हुए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर वन विभाग की जमीन अपने करीबी लोगों को आवंटित कर दी थी। एसीबी रांची ने शराब घोटाले संबंधित गड़बड़ी को आधार बनाकर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में भी प्राथमिकी दर्ज की है। विनय चौबे के खिलाफ पांचवीं प्राथमिकी जगन्नाथपुर थाने में ठगी के आरोप में दर्ज की गई। सभी मामलों में जांच जारी है।
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