Home » Gold खरीदने जा रहे हैं तो पहले एक बार जरूर चेक कर लें कीमत

Gold खरीदने जा रहे हैं तो पहले एक बार जरूर चेक कर लें कीमत

सोने की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारी सीजन के चलते गोल्ड की मांग में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे कीमतों में इजाफा हो रहा है। इसके अलावा, अमेरिका में मौजूदा आर्थिक आंकड़े को भी इसके लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है।

by Rakesh Pandey
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

नई दिल्लीः यदि आप गोल्ड खरीदने का सोच रहे हैं, तो पहले सोने की कीमतें चेक कर लें। दिल्ली में सोने की कीमतें फिर से आसमान छूने लगी हैं, और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर भी गोल्ड की कीमतें 76,000 रुपए के पार जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारी सीजन के चलते गोल्ड की मांग में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे कीमतों में इजाफा हो रहा है। इसके अलावा, अमेरिका में मौजूदा आर्थिक आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि नवंबर में अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेड ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।

दिल्ली में सोने और चांदी के दाम

शुक्रवार को दिल्ली में सोने का भाव 1,150 रुपए बढ़कर 78,500 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया। इससे पहले गुरुवार को 99.9% शुद्धता वाले सोने की कीमत 77,350 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। तीन दिन की गिरावट के बाद, 99.5% शुद्धता वाला सोना 1,150 रुपए बढ़कर 78,100 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया। चांदी की कीमत भी 1,500 रुपए की वृद्धि के साथ 93,000 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि पहले यह 91,500 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

एमसीएक्स पर भी तेजी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी गोल्ड की कीमतें बढ़ी हैं। अक्टूबर महीने में अब तक गोल्ड के दाम में लगभग 700 रुपए प्रति 10 ग्राम का इजाफा हुआ है। पिछले महीने के आखिरी कारोबारी दिन गोल्ड की कीमत 75,611 रुपए प्रति 10 ग्राम थी, जबकि अब यह 76,307 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है।

चांदी की कीमतों का हाल

सिल्वर की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। अक्टूबर में अब तक सिल्वर के दाम में करीब 1,000 रुपए प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ है। पिछले महीने के अंत में सिल्वर की कीमत 90,719 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जबकि वर्तमान में यह 91,690 रुपए हो चुकी है।

क्या कह रहे विशेषज्ञ

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतीन त्रिवेदी ने कहा कि सोने की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी आर्थिक आंकड़े हैं। अमेरिकी आंकड़े ब्याज दरों में कटौती की संभावना को समर्थन दे रहे हैं। विशेष रूप से, उच्च बेरोजगारी दावे और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति के दबाव का संकेत हैं।

Read Also-RBI की 10वीं बैठक, रेपो दर में नहीं हुआ बदलाव, UPI ट्रांजैक्शन सीमा में हुई वृद्धि

Related Articles