RANCHI : आईआईएम रांची ने प्रबंधन और सामाजिक विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए देश का पहला अंतर-विषयक अनुसंधान पद्धति समूह स्थापित किया है। यह पहल शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराएगी, जहां वे पारंपरिक विषयगत सीमाओं से आगे बढ़कर अनुसंधान पद्धतियों पर काम कर सकेंगे। आरएमजी के अध्यक्ष प्रो. कुशाग्र शरण ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य शोध संस्कृति को मजबूत करना, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर पद्धतिगत विकास में योगदान देना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मंच भविष्य में शोध और नवाचार को नई दिशा देगा।
उन्होंने बताया कि सामाजिक विज्ञान से जुड़े विषय जैसे आर्थिक विकास, सार्वजनिक नीति और पर्यावरणीय स्थिरता मजबूत अनुसंधान पद्धति पर आधारित होते हैं। लेकिन वर्तमान शैक्षणिक व्यवस्था में पद्धतिगत प्रशिक्षण अक्सर अलग-अलग विषयों तक सीमित रह जाता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए आरएमजी की स्थापना की गई है। जिससे कि विभिन्न विषयों के शोधकर्ता एक-दूसरे के अनुभव और पद्धतियों से सीख सकें। साथ ही जटिल समस्याओं का बेहतर समाधान खोज सकें।
आरएमजी को एक ऐसे साझा मंच के रूप में विकसित किया गया है, जहां प्रशिक्षण, नवाचार, सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान की व्यवस्था होगी। हाल ही में इस समूह की ओर से व्याख्यात्मक शोध पद्धति पर पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। जिसमें शोधार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया। इसके माध्यम से सिद्धांत और व्यवहार के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। आरएमजी क्षमता निर्माण और नेटवर्क विकास के लिए एक रणनीतिक रोडमैप पर भी काम कर रहा है। इसके तहत शोध के दार्शनिक आधार, अनुसंधान डिजाइन और विश्लेषणात्मक तकनीकों को एक साथ जोड़कर व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें मात्रात्मक, गुणात्मक और मिश्रित पद्धतियों के साथ-साथ सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर, टेक्स्ट माइनिंग, नेटवर्क विश्लेषण और कम्प्यूटेशनल तकनीकों पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

