पटना : बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को पटना स्थित सदाकत आश्रम, कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में तेजस्वी यादव की अध्यक्षता में INDIA गठबंधन (महागठबंधन) की कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक दोपहर 1 बजे शुरू होगी, जिसमें गठबंधन के छह घटक दलों के 13 प्रतिनिधि भाग लेंगे।

तेजस्वी यादव की अध्यक्षता में को-ऑर्डिनेशन कमेटी की पहली बैठक
यह बैठक INDIA गठबंधन की नई को-ऑर्डिनेशन कमेटी के गठन के बाद पहली बैठक है, जिसकी अध्यक्षता राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव करेंगे। को-ऑर्डिनेशन कमेटी में राजद, कांग्रेस, CPIML, CPI, CPM और VIP दलों से दो-दो सदस्य शामिल किए गए हैं। राजद से तीन सदस्य कमेटी में शामिल हैं, जिससे पार्टी को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिला है।
मुख्य एजेंडा : सीट शेयरिंग और मुख्यमंत्री का चेहरा
बैठक में बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें प्रमुख हैं:
-सीट शेयरिंग फार्मूला का निर्धारण
-मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर सहमति
-संयुक्त चुनाव प्रचार रणनीति
-मीडिया और सोशल मीडिया कैंपेन की रूपरेखा
-गठबंधन का सांझा घोषणा पत्र (मेनिफेस्टो) तैयार करना
यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब तेजस्वी यादव ने हाल ही में दिल्ली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की थी। इसके बाद 17 अप्रैल को पटना में पहली बैठक आयोजित की गई थी।
कांग्रेस कर रही है 2020 के सीट फार्मूले की मांग
कांग्रेस 2025 के विधानसभा चुनाव के लिए 2020 के सीट शेयरिंग फार्मूले को आधार मानने की मांग कर रही है। 2020 के चुनाव में कांग्रेस को 70 सीटें दी गई थीं, जिसमें पार्टी केवल 19 सीटें जीत पाई थी। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व बार-बार यह दोहरा रहा है कि 2025 में भी वही फार्मूला लागू किया जाए।
2020 का महागठबंधन सीट वितरण
दल का नाम : सीटें (2020)
राजद : 144
कांग्रेस : 70
CPIML : 19
CPI : 6
CPM : 4
कुल 243 सीटों पर हुए चुनाव में महागठबंधन को बहुमत के बेहद करीब पहुंचने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा। विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के कारण तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नहीं बन पाए।
2025 चुनाव में बढ़ती चुनौतियां
INDIA गठबंधन के समक्ष 2025 के चुनाव में कई चुनौतियां हैं:
-सीटों का संतुलित वितरण
-गठबंधन में सामंजस्य बनाए रखना
-जनमत को एकजुट करने की रणनीति
-राजनीतिक संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना
गठबंधन को यह तय करना है कि क्या कांग्रेस को उतनी ही सीटें दी जाएं, जितनी वह मांग रही है, या फिर पिछले प्रदर्शन के आधार पर सीटों में बदलाव किया जाए।

