Home » सच में अमेरिका का 51वां हिस्सा बनेगा कनाडा, क्या है ट्रंप की योजना…?

सच में अमेरिका का 51वां हिस्सा बनेगा कनाडा, क्या है ट्रंप की योजना…?

अमेरिका में नया राज्य जोड़ने के लिए अमेरिकी कांग्रेस को दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट – से प्रस्ताव पारित कराना होगा।

by Anurag Ranjan
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

न्यूयॉर्क : कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने का प्रस्ताव एक बार फिर चर्चा में है, और इस बार यह प्रस्ताव खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिया गया है। ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद यह विचार व्यक्त किया था कि कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बना दिया जाए, लेकिन क्या यह विचार व्यावहारिक है? चलिए, जानते हैं।

कनाडा और अमेरिका का क्षेत्रफल

कनाडा अमेरिका से लगभग 1,51,150 वर्ग किलोमीटर बड़ा है। यदि कनाडा अमेरिका का 51वां राज्य बनता है, तो यह आकार में मौजूदा अमेरिका से भी बड़ा होगा। इस प्रस्ताव को लेकर ट्रंप की मंशा साफ है – वे चाहते हैं कि कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाकर दोनों देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाए।

ट्रंप की अपील और कनाडा की संवैधानिक बाधाएं

कनाडा और अमेरिका के बीच स्थितियां थोड़ी अलग हैं। जहां अमेरिका एक गणराज्य है, वहीं कनाडा में राजशाही की व्यवस्था है। कनाडा के संविधान के तहत, अगर कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाना है, तो यह एक जटिल संवैधानिक प्रक्रिया होगी। कनाडा एक्ट 1982 के अनुसार, इसके लिए संविधान में संशोधन और राजशाही व्यवस्था को बदलना होगा, जो कि संभवतः आसान नहीं होगा।

कनाडाई नागरिकों की राय

ट्रंप का यह प्रस्ताव कनाडा में ज्यादा समर्थन नहीं पा सका। हाल ही में एक पोल के अनुसार, केवल 13 प्रतिशत कनाडाई नागरिकों ने इस विचार को स्वीकार किया, जबकि 87 प्रतिशत ने इसे पूरी तरह से नकार दिया। यह स्थिति इस बात की गवाह है कि कनाडाई नागरिकों का अमेरिका के साथ विलय के लिए कोई खास उत्साह नहीं है।

अमेरिका में नया राज्य बनाने की संवैधानिक प्रक्रिया

अमेरिका में नया राज्य जोड़ने के लिए अमेरिकी कांग्रेस को दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट – से प्रस्ताव पारित कराना होगा। इसके लिए महाभारतीय बहुमत की आवश्यकता होगी, और इससे भी बड़ी बात यह है कि कनाडा की सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिखती। कनाडा के विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रस्ताव अधिकतर समय हंसी में ही उड़ा दिया जाएगा।

ट्रंप की नीति और अमेरिकी विस्तारवाद

ट्रंप का यह प्रस्ताव उनकी “अमेरिका फ़र्स्ट” नीति के तहत देखा जा सकता है। ट्रंप के लिए यह एक व्यापारिक कदम हो सकता है, क्योंकि वे चाहते हैं कि कनाडा के साथ व्यापार संबंधों को और भी लाभकारी बनाया जाए। कनाडा को अमेरिका में शामिल करने से टैरिफ कम हो सकते हैं और सुरक्षा के मामलों में भी दोनों देशों को फायदा हो सकता है।

ट्रंप का आक्रामक बयान

ट्रंप ने कहा कि कनाडा को हर साल 200 अरब डॉलर की सब्सिडी देने से अमेरिका थक चुका है। इस बयान से यह साफ होता है कि वे कनाडा के साथ व्यापारिक रिश्तों को और मजबूती देने के लिए इस तरह के प्रस्ताव दे रहे हैं। हालांकि, उनकी नीति और बयानों का कनाडा के नेताओं पर कोई खास असर नहीं हुआ है, और ट्रूडो के इस्तीफे के बाद भी इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

संभावित नतीजे

कनाडा के अधिकतर नागरिक ट्रंप के प्रस्ताव से खुश नहीं हैं, और इससे यह भी साबित होता है कि कनाडा अपने स्वतंत्र अस्तित्व को बरकरार रखना चाहता है। हालांकि, ट्रंप के इस विचार में राजनीतिक विवाद और संवैधानिक समस्याएं निहित हैं, जो कि इसे व्यावहारिक रूप से लागू होने में मुश्किल बना देती हैं।

Read Also: Victory of Indian Americans in America : दो डेमोक्रेट उम्मीदवार वर्जीनिया जनरल असेंबली के लिए निर्वाचित

Related Articles