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Iran Israel War : ईरान-अमरीका के बीच सीजफायर, लेकिन अगर जंग लंबी चलती तो भारत पर पड़ते ये बड़े असर

by Mujtaba Haider Rizvi
Iran America Conflict
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सेंट्रल डेस्क : ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब थमता नजर आ रहा है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर का एलान कर दिया है। माना जा रहा है कि अमरीका ने रूस और चीन के राष्ट्रपति से इस युद्ध को रुकवाने का अनुरोध किया था। इसके बाद रूस ने ईरान को अमेरिका से सीज फायर करने को मना लिया है। इसराइल कतर और सऊदी अरब के जरिए पहले ही सीज फायर का प्रस्ताव ईरान को दे चुका था। इसलिए, ईरान ने कह दिया है कि इसराइल अगर ईरान पर और हमले नहीं करता तो सीजफायर रहेगा। वैसे इसराइल के हर हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
अमरीका के ईरान की तीन न्यूक्लियार साइट्स पर हमले के बाद से ही पेंटागन को आशंका थी कि ईरान तगड़ा पलटवार करेगा। इसलिए अमरीका ने ईरान का हमला रुकवाने के लिए कूटनीति शुरू कर दी थी। मगर, सोमवार की रात जब ईरान ने अमेरिका के सीरिया, इराक, कतर और बहरीन के सैन्य अड‍्डे मिसाइलों से दहला दिए तो अमरीका ने सीजफायर का एलान कर दिया। रूस और चीन के अनुरोध पर ईरान ने भी सीजफायर मान लिया है।

सीजफायर की घोषणा दोनों देशों की ओर से हो चुकी है, जिससे क्षेत्रीय तनाव में फिलहाल कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है कि अगर यह युद्ध लंबा चलता, तो इसका भारत पर क्या असर पड़ सकता था?

क्या हुआ था अब तक

इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष की शुरुआत सीमित हमलों से हुई थी, लेकिन जब ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, तो जंग का दायरा बढ़ता दिखा।
अमेरिका की एंट्री के बाद आशंका जताई जाने लगी थी कि यह क्षेत्रीय युद्ध, वैश्विक युद्ध में तब्दील हो सकता है।

अगर युद्ध लंबा चलता तो भारत पर होते ये 5 बड़े असर

  1. तेल कीमतों में भारी उछाल

ईरान खाड़ी क्षेत्र का प्रमुख तेल उत्पादक देश है। युद्ध की स्थिति में कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होती, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें आसमान छूतीं। भारत, जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए कच्चे तेल का 85% आयात करता है, उसे ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि झेलनी पड़ती।

  1. रुपया होता कमजोर, महंगाई बढ़ती

तेल महंगा होने से भारत का वाणिज्य घाटा बढ़ता, जिससे रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता। इसका असर हर उस वस्तु पर पड़ता जिसे भारत आयात करता है—खासतौर पर खाद्य तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, उर्वरक, आदि।

  1. विदेशी निवेशकों की घबराहट

युद्ध की वजह से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता आती, जिससे विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालते। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार और निवेश माहौल पर पड़ता।

  1. प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर चिंता

ईरान, इज़राइल और खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा, और संभावित वापसी का खर्च भारत सरकार पर आता। इससे भारत के लिए मानवीय संकट खड़ा हो सकता था।

  1. व्यापार और शिपिंग पर असर

स्ट्रेट ऑफ होरमुज जैसे सामरिक व्यापारिक रास्तों से भारत का भारी व्यापार होता है। युद्ध की वजह से इन रास्तों में बाधा आती तो भारतीय निर्यात-आयात दोनों प्रभावित होते। इससे लॉजिस्टिक्स और व्यापार घाटा बढ़ सकता था।

भारत की कूटनीति और रणनीति पर असर

भारत लंबे समय से ईरान और इज़राइल दोनों का रणनीतिक साझेदार रहा है। ऐसे में युद्ध की स्थिति में भारत के लिए संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाता। साथ ही अमेरिका के साथ बढ़ते रक्षा और व्यापार संबंध भी भारत की कूटनीतिक चुनौती को और जटिल बना देते।

अब जबकि सीजफायर की घोषणा हो चुकी है, भारत को फिलहाल राहत मिली है*, लेकिन यह घटना बता गई कि *पश्चिम एशिया में कोई भी बड़ा संघर्ष भारत की अर्थव्यवस्था और कूटनीति दोनों पर गहरा असर डाल सकता है।

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