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अंतरिम बजट क्या होता है? जानिए…..

by Rakesh Pandey
Interim Budget
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कारोबार डेस्क। Interim Budget: देश के वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बजट पेश करने का समय करीब आ रहा है। इनदिनों अंतरिम बजट चर्चा में है। आर्थिक क्षेत्र में हमेशा कुछ नया होता रहता है, और इसमें राजनीतिक और आर्थिक प्रक्रियाओं में अपार परिवर्तनों का सामना करना होता है। “अंतरिम बजट” (Interim Budget) एक ऐसा आर्थिक साधन है जो सरकार को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा में मदद करने का एक माध्यम है।

इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि सरकार अपने नागरिकों को निर्दिष्ट समयावधि के लिए एक स्थायी बजट प्रदान कर सके, जो आर्थिक अस्थिरता और आपातकालीन परिस्थितियों के समय उपयोगी होता है। इसके माध्यम से सरकार नई आर्थिक योजनाओं को शुरू करने और विकास के प्रति अपने प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने में सक्षम होती है।

अंतरिम बजट (Interim Budget) क्या है?

भारतीय राजनीति और आर्थिक प्रणाली में Interim Budget एक महत्वपूर्ण विषय है। जब भी नई सरकार आती है, या कोई भी आपातकालीन परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले एक अस्थायी बजट को ‘Interim Budget’ कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य देश को अनापत्ति से निपटने में मदद करना और आर्थिक स्थिति को सुधारना है।

इन परिस्थितियों में लाया जाता है अंतरिम बजट (Interim Budget)

अंतरिम बजट ( Interim Budget ) का प्रस्ताव वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है जब कोई भी सरकार आपातकालीन परिस्थितियों का सामना कर रही है, जैसे कि विशेष रूप से कठिनाईयों, आतंकवादी हमलों, या अन्य संकटों की स्थिति में। यह बजट सामान्यत: एक वित्त वर्ष के बीच लागू किया जाता है, जिससे वित्त मंत्री एक स्थिति का मूल्यांकन करके आवश्यक निर्णय लेने में सक्षम होता है।

अंतरिम बजट (Interim Budget) का लक्ष्य क्या है?

इस बजट का एक मुख्य लक्ष्य है आर्थिक स्थिति में उत्पन्न नकारात्मक परिणामों को सुधारना, वित्तीय परिस्थितियों को स्थायी बनाना, और देश को अपातकालीन स्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करना है। इसमें आर्थिक योजनाओं को संचालन करने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों का मूल्यांकन किया जाता है और सभी आवश्यक खर्चों को संभालने का प्रयास किया जाता है।

आर्थिक सुरक्षा के मामले में मददगार

इसके अलावा, Interim Budget देश के लोगों को आर्थिक सुरक्षा में मदद करने के लिए कई कदम उठाता है। यह सामान्यत: आम जनता के हित में होता है, ताकि उन्हें आर्थिक असुरक्षा के समय में सहारा मिल सके। इसके अंतर्गत, नौकरी और रोजगार के स्तर को बनाए रखने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, और उद्योगों को संजीवनी प्रदान करने के लिए योजनाएं शामिल की जाती हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, और कृषि क्षेत्र में भी निवेश किया जाता है ताकि देश के नागरिकों को सुधारित सुविधाएं मिल सकें।

नागरिकों को मिलता है भरोसा

Interim Budget, विभिन्न क्षेत्रों के विकास को ध्यान में रखते हुए, सुरक्षित और स्थायी आर्थिक स्थिति की साधना करने का एक माध्यम है। यह सरकार को आपातकालीन स्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है और देश को आर्थिक सुरक्षा में मदद करने का मार्ग दिखाता है। इसके माध्यम से, सरकार सकारात्मक कदम उठाकर नागरिकों को सहारा प्रदान कर सकती है और देश को सुरक्षित और स्थिर आर्थिक भविष्य की दिशा में अग्रणी बना सकती है। अंतरिम बजट, एक आर्थिक रूप से सुदृढ़ और सुस्तर भविष्य की नींव रखने का एक कदम है जो देश को समृद्धि और समृद्धि की दिशा में मजबूती प्रदान कर सकता है।

कब आता है अंतरिम बजट (Interim Budget)?

Interim Budget, सामान्यत: एक वित्त वर्ष की अवधि के उपरांत पेश किया जाता है, जब लोकसभा चुनावों की सम्भावना होती है। इसमें सरकार केवल कुछ महीनों के लिए वित्तीय योजनाएं प्रस्तुत करती है, जो आगामी बजट में संशोधन के लिए आधार प्रदान करती हैं। चुनावों के बाद, जब नई सरकार गठित होती है, तब पूर्ण बजट (Full Budget) पेश किया जाता है। इस प्रकार, यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो चुनाव की संभावना के समय वित्त मामलों को संचित करने की क्षमता प्रदान करती है।

अंतरिम बजट (Interim Budget) का इतिहास:

भारत के इतिहास में पहला अंतरिम बजट मोरारजी देसाई ने वर्ष 1962-63 में पेश किया था। पहले अंतरिम बजट में, आर्थिक नीतियों, कर दरों, और योजनाओं में आपातकालीन परिस्थितियों के अनुसार संशोधन करने का प्रयास किया गया। इसे अपनी आर्थिक नीतियों में तत्परता और पुनर्निर्माण की दृष्टि से देखा जा सकता है, जिससे राष्ट्र को आर्थिक उत्थान की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता हो।

वहीं वर्ष 1991-92 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार जाने के बाद यशवंत सिन्हा ने अंतरिम बजट पेश किया। बता दें कि विभिन्न आर्थिक अवस्थाओं, बाजार स्थितियों, और विशेष आपातकालीन परिस्थितियों के कारण अंतरिम बजट का स्वरूप परिवर्तन करता रहा है।

 

 

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