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International Wild life Trafficking : नेपाल व बांग्लादेश से संचालित अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर गिरोह के 61 सदस्य गिरफ्तार, सरगना का नाम जान हैरान रह जाएंगे

करोड़ों के वन्य जीव व खाल बरामद, पिछले साल नवंबर से 20 जनवरी तक वन विभाग के अधिकारियों ने तस्करों के ठिकानों पर की छापामारी, चीन से दक्षिण पूर्व एशिया तक फैला है तस्करों का जाल

by Mujtaba Haider Rizvi
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Palamu: झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों का शिकार कर उनकी तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर गिरोह के 61 लोग गिरफ्तार हुए हैं। गिरफ्तार तस्करों के पास से करोड़ों रुपए कीमत के वन्य जीव और उनके अवशेष बरामद हुए हैं। यह कार्रवाई पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक के निर्देश पर की गई है। गिरफ्तार आरोपी अंतर्राष्ट्रीय गिरोह के सदस्य हैं। उनका नेटवर्क बांग्लादेश और नेपाल से संचालित होता है। यह नेटवर्क चीन और दक्षिण पूर्व एशिया तक फैला हुआ है।
बताते हैं कि वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और पलामू टाइगर रिजर्व की संयुक्त टीम ने झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के इलाकों में छापामारी कर गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह छापामार कार्रवाई पिछले साल 18 नवंबर से 20 जनवरी 2026 तक की गई है। 20 जनवरी को भी छत्तीसगढ़ के कई ठिकानों पर छापामारी कर तस्करों की गिरफ्तारी की गई है।

कौन है नेटवर्क का सरगना

पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने शुक्रवार को बताया कि कार्रवाई के दौरान बिहार के औरंगाबाद का रहने वाला सिराज गिरफ्तार हुआ है। उस पर सांप के जहर की तस्करी का आरोप लगाया गया है। उसके पास से सांप का जहर बरामद हुआ है। इसके अलावा, बिहार के बक्सर का ही रहने वाला जयराम सिंह, इंद्रजीत कुशवाहा, मधुबनी का अजय कुमार झा, मुजफ्फरपुर का रहने वाला धीरज कुमार श्रीवास्तव और मधुबनी के पंकज कुमार झा को भी गिरफ्तार किया गया है। नेटवर्क का सरगना कौन है। इसकी तहकीकात शुरू कर दी गई है।

बिहार में बड़ी राजनीतिक हस्ती माने जाते हैं यह दोनों

जयराम सिंह और अजय कुमार झा बिहार में बड़ी राजनीतिक हस्ती माने जाते हैं। इससे लगता है कि पूरे नेटवर्क को किसी बड़े राजनेता का संरक्षण प्राप्त है। इन सभी पर तेंदुआ और हिरण की खाल की तस्करी का आरोप है। अजय कुमार झा के पास से दो मुहा सांप बरामद हुआ है। जांच में यह भी सामने आया कि अजय कुमार झा दो मुहा सांप को पालतू जानवर के तौर पर अपने यहां रखता था।

कहां से किस तस्कर की हुई गिरफ्तारी

वन विभाग की टीम ने झारखंड के पालकोट से भूरण सिंह, मेदिनी नगर से गोपाल सिंह प्रसाद, रांची से मसूद आलम, पलामू के हरिहरगंज से राजू कुमार, लातेहार के चंदवा से जमशेद और बगरू से राजू उरांव को गिरफ्तार किया है। राजू उरांव पहले नक्सली था। साल 2007-08 में वह मुख्य धारा में शामिल हुआ था और एक बड़े राजनेता के तौर पर उभरा था। आरोप है कि राजू बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच इस नेटवर्क की बड़ी कड़ी है। वह शिकारों और तस्करों के नेटवर्क से बराबर संपर्क में रहता था। मसूद आलम भी दो मुहा सांप की तस्करी में लिप्त बताया जाता है।

तस्करों के पास से बरामद हुआ यह सामान

बताया जा रहा है कि तस्करों के पास से 60 किलो पैंगोलिन का शल्क, दो रेड सैंड बोआ यानी दो मुहा सांप, 2 किलो कोरल, दो हिरण और एक तेंदुए की खाल, 1200 ग्राम सांप का जहर, बाघ की हड्डी का पाउडर और मोर के पंख बरामद हुए हैं। झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में कार्रवाई के दौरान जो छापामारी टीम काम कर रही थी, उसमें पलामू के अलावा लातेहार, गढ़वा, जमशेदपुर, रांची, गुमला और पालकोट के वन विभाग के अधिकारी शामिल थे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के कुसमी के एसडीओ, जयपुर, बलरामपुर, डीडीयूएस टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अलावा, बिहार के दरभंगा और बांका के डीएफओ भी टीम में शामिल थे।

बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ के अलावा नेपाल व बांग्लादेश के जंगलों से भी होता है शिकार

बताते हैं कि यह अंतरराष्ट्रीय वन्य जीव तस्कर नेटवर्क बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के अलावा नेपाल और बांग्लादेश से भी वन्यजीवों का शिकार करता था। नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में वन्यजीवों की तस्करी होती है। वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पता चला है कि वन्य जीव और उनके अवशेष सबसे पहले नेपाल और बांग्लादेश पहुंचाए जाते थे और वहां से फिर चीन और दक्षिण पूर्व एशिया में इसे ले जाकर ऊंची कीमत पर बेचा जाता था। वन विभाग को पता चला है कि इस अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह में कई सफेद पोश नेता भी शामिल हैं। उनके खिलाफ सबूत जुटाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इस तस्कर गिरोह के निशाने पर झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के जंगल हैं। यहां से वन्य जीवों को पकड़ कर ले जाया जाता था। वन्य जीवों का बड़ा मार्केट चीन है। जांच में यह बात सामने आई है कि अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह के लोग झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार के जंगलों में जाते थे और वहां के लोगों को बहला-फुसला कर और लालच देकर उनसे शिकार कराया जाता था। फिर उनसे कम कीमत पर इन्हें खरीद कर बड़े तस्करों को ऊंची कीमत पर उपलब्ध कराया जाता था।

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