Jamshedpur : पूर्वी सिंहभूम में नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस की जिला इकाई का रोल फ्लाप रहा। पार्टी की लचर रणनीति के चलते मानगो और जुगसलाई में पार्टी को भारी बगावत का सामना करना पड़ा। जुगसलाई में तो पार्टी की उम्मीदवार इंदू देवी ने ही आखिरी लम्हे में भाजपा का दामन थाम लिया। मानगो नगर निगम चुनाव में भी पार्टी की कम छीछालेदर नहीं हुई। यहां कांग्रेस के अपने ही बागी हो गए। इससे जमशेदपुर में कांग्रेस की छवि जहां धूल-धूसरित हो गई है तो वहीं मतदान के बाद पार्टी के पदाधिकारियों में छिड़ी सियासी जंग आग में घी का काम कर रही है।
जिला नेतृत्व नहीं बना सका ठोस रणनीति
राजनीति के जानकारों का कहना है कि पार्टी नगर निकाय चुनाव में ठोस रणनीति ही नहीं बना पाई। पार्टी के जिलाध्यक्ष परविंदर सिंह फैसले लेने के मामले में ढीले दिखाई दिए। उनके फैसलों पर ऐसे लोगों का असर साफ नजर आया जो सियासत के अनाड़ी कहे जाते हैं। कहा जा रहा है कि अगर कांग्रेस ने नामांकन से पहले ही अपने सारे पत्ते खोल दिए होते तो उसकी यह दशा नहीं होती। बताया जा रहा है कि जब आनंद बिहारी दुबे अध्यक्ष थे तो पार्टी में दमदारी दिखती थी। जब से नए अध्यक्ष का चुनाव हुआ है पार्टी संगठन सुस्त हो गया है। अब संगठन में वह दम नहीं रहा कि वह जुगसलाई या मानगो में अपने उम्मीदवार को चुनाव जिता सके। हालांकि, इन दोनों जगह कांग्रेस के वोट बैंक की भरमार है। मानगो में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने अपनी पत्नी सुधा गुप्ता के चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी। यहां उनका अपना नेटवर्क काम कर रहा था। जबकि, कांग्रेस का संगठन मूकदर्शक नजर आया। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा नेतृत्व की कमी से हुआ। पार्टी हालात सुधारने पाने की जगह नेताओं का निलंबन और निष्कासन कर लकीर पीटती नजर आई। नेतृत्व ने कहीं डैमेज कंट्रोल की कोशिश नहीं की। पूरे चुनाव के दौरान कांग्रेस के कतिपय बड़े नेता अपने ऐशगाह से बाहर नहीं निकले।
जुगसलाई में भारी पड़ी नेतृत्व में अनुभव की कमी
पार्टी ने चुनाव से पहले घोषित ही नहीं किया कि जुगसलाई और मानगो में उनका समर्थित उम्मीदवार कौन होगा। जब नामांकन का दौर खत्म हो गया तब पार्टी ने अपने समर्थित उम्मीदवारों की घोषणा की। जुगसलाई में बिना नेताओं का बैक ग्राउंड जाने समर्थित उम्मीदवारी का एलान कर दिया गया। यहां एक कांग्रेस नेता अभिजीत सिंह की मां इंदू देवी को उम्मीदवार बनाया गया। मगर, मतदान से एक दिन पहले इंदु देवी ने वीडियो मैसेज जारी कर भाजपा को समर्थन देने का एलान कर दिया। कहा जा रहा है कि अगर पार्टी पहले से तय कर खांटी कांग्रेसी को उम्मीदवार बनाती तो जुगसलाई में उसकी स्थिति जुदा होती। पार्टी में महिला विंग है। किसी महिला नेत्री को प्रत्याशी बनाया जा सकता था। मगर, जिलाध्यक्ष की लचर नीति के चलते ऐसा नहीं हो सका। यही वजह रही कि जुगसलाई में पार्टी गच्चा खा गई और अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाई। कांग्रेस इसका पलटवार भी नहीं कर पाई। पार्टी ने इंदू देवी के बेटे अभिजीत को आजीवन कांग्रेस से निष्कासित करने का फरमान जारी कर अपने कर्तव्य की इति श्री समझ ली।
भाजपा की रणनीति से कांग्रेस की सियासत को मात
जुगसलाई में पार्टी के उम्मीदवार के ऐन मौके पर भाजपा को समर्थन देने के मामले की हर तरफ चर्चा है। सूत्र तो यह बताते हैं कि यहां कांग्रेस भाजपा की सियासी रणनीति का शिकार हो गई। सूत्रों का कहना है कि जुगसलाई में जो कुछ हुआ उसकी पटकथा भाजपा ने ही लिखी थी। यह भाजपाइयों की रणनीति का हिस्सा था कि उन्होंने कांग्रेस के अंदर मौजूद भाजपाई स्लीपर सेल का इस्तेमाल करते हुए अपने ही करीबी को टिकट दिला दिया और मतदान की पूर्व संध्या पर उससे भाजपा के पाले में होने का एलान करा दिया। इससे काफी हद तक माहौल भाजपा के पक्ष में बना। फिर भी यहां निर्दलीय उम्मीदवार नौशीन खान ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी है। मगर, कांग्रेस की स्थिति सांप छछूंदर वाली हो गई है। यहां की उम्मीदवारी कांग्रेस से न उगलते बन रही है और ना ही निगलते।
ढिलाई से ही मानगो में बगावत
इसके चलते मानगो में कांग्रेस पार्टी से ही कई उम्मीदवार सामने आ गए। इनमें मौलाना पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अंसार खान की पत्नी, कांग्रेस नेता फिरोज खान की पत्नी जेबा खान, कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह की पत्नी आदि प्रमुख हैं। कहा जा रहा है कि अगर पार्टी ने नामांकन से पहले ही कोई मीटिंग कर तय कर लिया होता कि चुनाव में पार्टी की तरफ से मेयर पद के लिए एक कैंडीडेट ही चुनाव मैदान में उतरेगा तो शायद यह हालात नहीं होते। पार्टी के सिपाहसालारों की चुप्पी का नतीजा था कि कई उम्मीदवार खड़े हो गए। कई उम्मीदवारों को गलतफहमी थी कि नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहे हैं तो कोई भी चुनाव में प्रत्याशी बन सकता है। इसी के चलते मानगो में राजनीतिक परिदृश्य बदला नजर आया। मानगो में अगर कांग्रेस संघर्ष करती नजर आई तो वह बन्ना गुप्ता का अपने नेटवर्क के बलबूते रहा। मानगो में कांग्रेसियों का भितरघात भी चर्चा का विषय है। कई कांग्रेसी नेता दूसरी पार्टी के एक बड़े नेता की सलाह पर अमल करते नजर आए। यहां भी पार्टी ने कांग्रेस नेता फिरोज खान, जितेंद्र सिंह और जेबा खान को पार्टी से निकालने के सिवा कुछ नहीं कर सकी।

