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Jamshedpur Rail News : जमशेदपुर में रेलवे का गरजा बुल्डोजर, 24 मकान कर दिए जमींदोज

चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान, गरीब परिवार हुए बेघर

by Mujtaba Haider Rizvi
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Jamshedpur : जमशेदपुर के सुंदरनगर क्षेत्र में मंगलवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब रेलवे प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाते हुए रेलवे फाटक के पास स्थित झोपड़पट्टी में बने 24 मकानों को बुल्डोजर से गिरा दिया। इस कार्रवाई में कई गरीब परिवारों को बेघर होना पड़ा।

हालांकि रेलवे प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया लीगल नोटिस के तहत की गई, लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया। लोगों का कहना है कि उन्हें खाली करने की नोटिस तो मिली, लेकिन रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी गई। कहा जा रहा है कि रेलवे को चाहिए था कि वह इन गरीबों को पहले कहीं घर दे। इन दिनों केंद्र और राज्य सरकार की कई आवास योजनाएं चल रही हैं। इसलिए अगर अधिकारी चाहें तो इन गरीबों की जांच करें और अगर इनके पास कहीं घर नहीं हैं तो इनके लिए किसी योजना के तहत एक आवास का इंतजाम तो किया ही जा सकता है।

रेलवे के अधिकारियों के पहुंचते ही मच गई अफरा-तफरी

दोपहर करीब 12:30 बजे रेलवे की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को घेर लिया। सायरन बजाकर लोगों से बाहर निकलने को कहा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोग अपने छोटे-छोटे सामान के साथ घबराए हुए बाहर निकलते नजर आए। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की आंखों में बेबसी और डर साफ दिख रहा था।

15 साल से रह रहे थे क्षेत्र में

स्थानीय निवासी निर्मला देवी ने कहा, “हम यहां पिछले 15 वर्षों से रह रहे हैं। बिजली का मीटर, आधार कार्ड, राशन कार्ड सब कुछ इसी पते पर है। अब बिना कोई व्यवस्था किए हमें बेघर कर दिया गया।” रामजी यादव ने कहा, “सरकार और अदालतें सिर्फ कागजों में हमारा साथ देती हैं, हकीकत में हमें इंसान नहीं समझा जाता।” नियमानुसार किसी भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास देना अनिवार्य है। कानूनी विशेषज्ञ नितिन श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रकार की कार्रवाई मानव अधिकार का हनन की श्रेणी में है। पीड़ित परिवार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।

रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि यह ज़मीन रेलवे की है और अतिक्रमण लंबे समय से था। उन्होंने यह भी कहा कि पुनर्वास और मुआवजा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई। राजनीतिक प्रतिक्रिया भी इस मुद्दे पर सामने आई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के स्थानीय नेता मनोज महतो ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “गरीबों के घर उजाड़ने की सजा सरकार को जनता देगी।” वहीं स्थानीय सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है और पीड़ितों के लिए तात्कालिक राहत एवं पुनर्वास की मांग की है। रेलवे केंद्र सरकार के अधीन है इसलिए गरीबों की हिफाजत के लिए भाजपा के नेताओं को आगे आना चाहिए।

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