Jamshedpur : शब-ए-बारात के मौके पर इमाम महदी अलैहिस्सलाम की वेलादत का जश्न भी मनाया गया। इस मौके पर जमशेदपुर में मानगो स्थित शिया जमा मस्जिद में महफिल-ए-मिलाद का आयोजन किया गया। स्थानीय शायरों ने इमाम महदी अलैहिस्सलाम की शान में कसीदे पढ़े।

बाद में मस्जिद में शबे बारात के आमाल अंजाम दिए गए और स्वर्ण रेखा नदी में अरीजा डाला गया।
गौरतलब है कि 12वें इमाम हजरत महदी अलैहिस्सलाम पर्दा-ए-गैब में हैं। जब दुनिया अत्याचार और जुल्म से भर जाएगी तो वह जाहिर होने के बाद अत्याचारियों को खत्म करेंगे और इस संसार को अद्ल और इंसाफ से भर देंगे। उनका जन्म 15 शाबान को हुआ था।
इसी के हवाले से मानगो की शिया जामा मस्जिद में कसीदाख्वानी का आयोजन किया गया। इस कसीदाख्वानी का आयोजन सैयद इनाम अब्बास की तरफ से हुआ।
सैयद इनाम अब्बास ने कसीदा पढ़ा- देर से ही सही है यह हमको यकीं, लेने मौला का इंतकाम, वारिस-ए-जुल्फेकार आएगा। खुदा की आखिरी हुज्जत जमाने का सहारा हो, तुम्हारे नाम से रौशन फलक का हर सितारा हो।
शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना जकी हैदर ने कर्बला में हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम के हमले का जिक्र करते हुए पढ़ा- अमां नहीं है कहीं कारजार हस्ती में, कछार छोड़ कर शेर आ गया है बस्ती में।
खुदा का फजल बशर पर तमाम बाकी है, नाम इस्लाम का, परचम, इमाम बाकी है।
वसी हसन ने पढ़ा- हर रात इब्ने हैदर व जहरा की याद हो, हर दिन जरूर वालियो आका की याद हो, एक और ईद आ गई मौला नहीं आए, बस यह ख्याल ए दर्द अलम साथ साथ हो।
अफसर हसनैन ने पढ़ा- यह 14 हैं तो इलाही निजाम जिंदा है, इन्हीं के नाम से खालिक का नाम जिंदा है। मना के जश्न बताते हैं हम जमाने को, हम ही वह लोग हैं जिनका इमाम जिंदा है।
इफ्तिखार अली ने पढ़ा- सहर करीब अंधेरों को दूर होना है, ज़लील दुश्मन-ए-दीं को जरूर होना है। बता रही हैं यह तब्दीलियां जमाने की, किसी वली का यकीनन जहूर होना है।
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