Jamshedpur (Jharkhand) : जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी भी अब कमोबेश कोल्हान यूनिवर्सिटी की राह पर चल पड़ा है। दरअसल, इन दिनों वीमेंस यूनिवर्सिटी में स्नातक (UG) थर्ड समेस्टर की परीक्षा चल रही है। परीक्षा में बीकॉम थर्ड सेमेस्टर की परीक्षार्थियों को एक बार फिर प्रश्नपत्र को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थिति यह रही कि कुछ छात्राओं की आंख से आंसू तक टपक रहे थे। बता दें कि इससे पूर्व परीक्षा के पहले दिन दो दिसंंबर को भी निगमीय वाणिज्य (Corporate Commerce) की परीक्षा में छात्राओं ने एक प्रश्न पर आपत्ति जताई थी। इस संबंध में संकाय की डीन को आवेदन देकर एक प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस होने की शिकायत की थी। बताया जाता है कि अभी तक पहली शिकायत का कोई हल नहीं निकला। इस बीच, मंगलवार को एक ही प्रश्नपत्र में तीन प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस पूछ दिए गए।

प्रश्नपत्र मिलते ही छात्राओं ने जताई आपत्ति
एग्जामिनेशन हॉल में प्रश्नपत्र मिलते ही छात्राओंं ने तीन प्रश्नों पर आपत्ति जताई। उन्होंने वीक्षकों को (Invigilator) बताया कि तीन प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस हैं। बावजूद, वीक्षक परीक्षा विभाग व विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति बगैर समस्या का कोई भी हल निकाल पाने में असमर्थ थे। ऐसे में छात्राएं हैरान-परेशान रहीं। उनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं था।
एक घंटे बाद पहुंंचीं परीक्षा नियंत्रक
परीक्षा पहली पाली में निर्धारित समय पर शुरू हो गई थी। परीक्षा कक्ष में समय पर उत्तरपुस्तिकाएं और प्रश्नपत्र भी छात्राओं के बीच बंट चुके थे। लेकिन, परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण मौके पर परीक्षा नियंत्रक यूनिवर्सिटी नहीं पहुंची थीं। छात्राओं ने बताया कि परीक्षा शुरू होने के एक बाद परीक्षा नियंत्रक यूनिवर्सिटी पहुंचीं। प्रश्नपत्र की जानकारी लेने के बाद उन्होंने आश्वस्त किया, तब छात्राओं ने थोड़ी राहत की सांस ली।
छात्राओं ने डीन को सौंपा ज्ञापन
परीक्षा में तीन प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस पूछे जाने के संबंध में छात्राओं ने संकाय की डीन डॉ. दीपा शरण से लिखित शिकायत की है। उन्हें एक ज्ञापन सौंप कर छात्राओं ने इसकी जानकारी दी है। साथ ही इस शिकायत पर अपने (छात्राओं) हित में निर्णय लेने की मांग की है।
क्या कहती हैं परीक्षा नियंत्रक
यूनिवर्सिटी की परीक्षा नियंत्रक डॉ. रमा सुब्रह्मण्यम ने कहा कि प्रश्नपत्र का पैकेट खुलने से पहले उन्हें भी पूछे गए प्रश्नों की जानकारी नहीं होती है। जो भी हो, तीन प्रश्नों के अलावा अन्य प्रश्न भी तो थे। छात्राएं उन प्रश्नों को भी अटेंप्ट कर सकती थीं। देखा जाए, तो आजकल एक चपरासी की नौकरी के लिए भी साक्षात्कार की प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में सीधे-सीधे प्रश्नों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, जो भी होगा, छात्राओं के हित में होगा। इस पर विचार किया जाएगा। इसे लेकर छात्राओं को भी आश्वस्त कर दिया गया है।
फिर वैकल्पिक प्रश्नों का क्या औचित्य?
परीक्षा नियंत्रक डॉ. रमा सुब्रह्मण्यम ने बहुत ही आसानी से कह दिया कि आउट ऑफ सिलेबस तीन प्रश्नों के अलावा अन्य प्रश्न भी तो थे। उन प्रश्नों को भी अटेंप्ट किया जाना चाहिए था। लेकिन, उनके इस जवाब के पीछे बड़ा सवाल छुपा है। वह यह कि बाकी प्रश्नों को सभी छात्राएं अटेंप्ट कर सकती हैं, तो वैकल्पिक प्रशनों का औचित्य ही है? वैकल्पिक प्रश्न वाले प्रश्नपत्र का प्रारूप ही बदल दिया जाना चाहिए।

