पटना: वक्फ संशोधन बिल के लोकसभा में पास होने के बाद, अब यह राज्यसभा में भी पारित होने की कगार पर है। इधर, इस विधेयक को लेकर बिहार में सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में नाराजगी और असंतोष का माहौल बनता जा रहा है। खासकर, पार्टी के पूर्व विधान पार्षद गुलाम रसूल बलियावी ने इस बिल पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है और खुलकर पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
मुस्लिम नेताओं के विरोध के बावजूद पार्टी के समर्थन से नाराजगी
गुलाम रसूल बलियावी ने इस बिल के पारित होने को लेकर तीखी आलोचना की और कहा कि अब देश में सेक्युलर और कम्युनल में कोई अंतर नहीं रह गया है। उनका यह बयान तब आया जब JDU ने मुस्लिम नेताओं के विरोध के बावजूद इस विधेयक का समर्थन किया। बलियावी ने बिना किसी का नाम लिए हुए कहा कि संसद में पार्लियामेंट के सभी सदस्य अब नंगे हो गए हैं, और यह स्थिति इस बात का संकेत है कि अब राजनीति में सेक्युलर और कम्युनल का फर्क खत्म हो गया है।
हमने बिल रोकने की भरपूर कोशिश की : रसूल बलियावी
गुलाम रसूल बलियावी ने कहा, “हमने वक्फ संशोधन बिल को रोकने के लिए हर संभव कोशिश की। जेपीसी के सदस्यों से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक से हम अपील करते रहे, लेकिन इसके बावजूद विधेयक पास हो गया।” उन्होंने यह भी कहा कि देशभर के मुसलमान और शांति-प्रिय लोग इस मुद्दे पर आक्रोशित हैं। उन्होंने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि अब यह बिल पारित हो चुका है और इसमें कोई शक नहीं कि सेक्युलरिज्म और कम्युनलिज्म के बीच का फर्क अब मिट चुका है।
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी
बलियावी ने चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर वह जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा, “हमलोग सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, और इसकी कानूनी समीक्षा करेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर कमेंट्स करने से बचने की सलाह दी और कहा कि इस मुद्दे पर सोच-समझ कर कार्यवाही करनी चाहिए। बलियावी की यह टिप्पणी पार्टी में न केवल असंतोष का संकेत दे रही है, बल्कि उनके समर्थकों के बीच भी सवाल खड़े कर रही है कि क्या पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को इस मुद्दे पर अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए।
JDU ने कहा- वक्फ संपत्तियों का होगा बेहतर प्रबंधन
वक्फ संशोधन बिल को लेकर मुस्लिम समाज में विरोध है, क्योंकि इस बिल में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाने की बात की गई है, जिसे मुस्लिम समाज का एक हिस्सा धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप मानता है। वहीं, JDU का कहना है कि इस बिल से वक्फ संपत्तियों का बेहतर तरीके से प्रबंधन होगा और कोई भी सांप्रदायिक उद्देश्य नहीं है।
पार्टी के भीतर बढ़ सकता है विरोध
गुलाम रसूल बलियावी का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि वक्फ संशोधन बिल के समर्थन में पार्टी के भीतर एक बड़ा विरोध हो सकता है, जो आगामी दिनों में और गहरा हो सकता है। इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर की राजनीति को लेकर अब जेडीयू नेतृत्व के सामने सवाल उठने लगे हैं।

