Ranchi : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में शनिवार को तृतीय अनुपूरक बजट पर चर्चा के बाद उसे सदन की मंजूरी मिल गई। राधा कृष्ण किशोर ने सरकार की ओर से 6,450 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। इसे बहुमत से पारित कर दिया गया।

वित्त मंत्री ने कहा कि प्रतिपक्ष द्वारा यह सवाल उठाया गया कि एक-डेढ़ महीने में इतनी बड़ी राशि कैसे खर्च होगी। जबकि मूल बजट के समय सभी प्रावधानों और योजनाओं की जानकारी पहले ही दी जा चुकी है।
उन्होंने साफ किया कि सरकार खर्च के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन पर भी बराबर ध्यान दे रही है। सीडी रेशियो को लेकर विधायक जयराम महतो की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास दर, जीडीपी, स्थापना व्यय का अनुपात, पूंजीगत व्यय और राजकोषीय अनुशासन जैसे संकेतक समय के साथ मजबूत होते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जीडीपी के तीन प्रतिशत से अधिक ऋण नहीं ले सकती। झारखंड ने अभी तक केवल 2.2 प्रतिशत ऋण लिया है, जबकि 0.98 प्रतिशत की और गुंजाइश शेष है।
पड़ोसी बिहार में अधिक ऋण लिए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
अब तक 22995 करोड़ रुपए किए गए खर्च
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि प्रथम और द्वितीय अनुपूरक बजट को मिलाकर लगभग 47 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसमें से 22,995 करोड़ रुपये अब तक खर्च हो चुके हैं। 31 मार्च तक 90 प्रतिशत राशि खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा ग्राम सड़क, महिला एवं बाल विकास, पंचायती राज, ऊर्जा, उच्च शिक्षा और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभागों में विशेष रूप से धनराशि आवंटित की गई है।
नीरा यादव ने पारदर्शिता पर उठाए सवाल
चर्चा के दौरान भाजपा विधायक नीरा यादव ने खर्च की पारदर्शिता और संभावित दुरुपयोग पर सवाल उठाए। इस पर वित्त मंत्री ने जवाब दिया कि सरकार शिलान्यास और विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करने के नियमों का पालन कर रही है। साथ ही राज्य के संसाधनों को सुदृढ़ कर आत्मनिर्भर विकास का लक्ष्य रखा गया है। बीच में हुई रोकटोक के बाद स्पीकर के हस्तक्षेप से चर्चा पूरी हुई और तृतीय अनुपूरक बजट को सदन से स्वीकृति मिल गई।

