Jharkhand Bureaucracy : गुरु बड़े सन्नाटे में थे। कभी अखबार के पन्ने उलट रहे थे। कभी मोबाइल की स्क्रीन खंगाल रहे थे। अचानक हुई आहट से थोड़े सकपका गए। सामने खड़े देखकर पूछा, अरे अब तक कहां भटक रहे हो? यह तो तुम्हारे दफ्तर का टाइम है। गुरु के सवालों में एक अनमना भाव उभर रहा था। शायद वह नहीं चाहते थे कि एकांत में कोई खलल पड़े। बेचैनी देखकर पूछ लिया, गुरु परेशान लग रहे हैं, सब ठीक है? गुरु ने जवाब दिया, हां-हां सब ठीक है।
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बस दो सवाल एक साथ सामने आ गए। इसलिए मन में कुछ असमंजस पैदा हो गया। गुरु की गोल-गोल बातें फिर सिर के ऊपर से निकल रही थीं। पूछा- गुरु साफ-साफ बताइए क्या हुआ? गुरु बोले- अगर जानना ही चाहते हो तो सुनो। वायरल ऑडियो वाले साहब फिर हिट हो गए हैं। पहले अध्याय में अपनी आवाज के जादू से तहलका मचाया था। अब तस्वीर के साथ कोहराम मचा रहे हैं। कुछ बेचारे खबरनवीस इतने डरे-सहमे हैं कि न तो पहले सच बताने की हिम्मत जुटाई, न ही अब जोखिम मोल लेने को तैयार हैं।
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अलख-अविनाशी की माया ऐसी है कि पूरी कहानी जन-मन तक पहुंच ही नहीं पा रही। गुरु की बात से एक चीज साफ हो गई थी। वायरल तस्वीर में एक मुख्य किरदार बड़े वाले साहब का है। आगे की कहानी समझने के लिए वायरल तस्वीर की जरूरत थी। लिहाजा, बड़ी मिन्नत-विन्नत की। गुरु ने तस्वीर सामने कर दी। देख लो, तुम्हारे अखबारों में सवाल पूछा जा रहा कि खान के गुर्गे को पुलिस प्रोटेक्शन कैसे मिली? दूसरी तरफ यह तस्वीर लाख सवालों का एक जवाब बनकर खड़ी है।
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गुरु की व्यथा देखकर सहमति के चार शब्द बोलने जरूरी थे। सो, कहा, सही कह रहे हैं गुरु, लेकिन एआई के जमाने में फोटो और वीडियो का क्या? कब, कौन, किसके साथ खड़ा कर दे, कुछ कह नहीं सकते। और यूं भी कि बड़े लोगों के साथ सेल्फी लेने का दौर है। कब, कौन, कहां से लेकर निकल जाए, बता नहीं सकते। गुरु ने पहले सिर हिलाया, फिर बोले, बात तो सही कह रहे हो, लेकिन बार-बार एक ही किरदार क्यों वायरल हो रहा? कुछ बता सकते हो? गुरु ने गंभीर सवाल पूछ लिया था। इसका जवाब तो शायद राणा-राणी के पास भी न हो। सूक्ष्म जीव भला क्या बोले? लिहाजा गुरु को उनके ही उधेड़बुन में छोड़कर हाथ जोड़े और विदा लिया।
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