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Jharkhand Dog Bite Cases : झारखंड में बढ़ रहे डॉग बाइट्स के मामले, नियंत्रण के लिए होगी कारगर व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार किया गया प्रस्ताव, कैबिनेट से ली जाएगी मंजूरी

by Nikhil Kumar
Jharkhand Dog Bite Cases:
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  • राज्य के 49 नगर निकायों में 12 डॉग शेल्टर और 50 केनल संचालित
  • साल 2024-25 में की गई 29491 कुत्तों की नसबंदी
  • वर्ष 2019 से 2025 के बीच 74315 कुत्तों का किया गया टीकाकरण

Ranchi : झारखंड में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राज्य सरकार द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 से 2025 (जनवरी तक) के बीच कुत्तों के काटने के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, 2022 में 9,539, 2023 में 31,251, 2024 में 43,875 और 2025 में जनवरी तक 5344 डॉग बाइट्स के मामले सामने आए हैं। इन बढ़ते मामलों को देखते हुए आवारा कुत्तों के नियंत्रण और टीकाकरण व्यवस्था पर अब जोर दिया जा रहा। बता दें कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई में विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में नगर विकास विभाग ने आवारा कुत्तों के नियंत्रण, शेल्टर की क्षमता बढ़ाने, नसबंदी और टीकाकरण अभियान को मजबूत करने से जुड़े प्रस्ताव पर राज्य मंत्रिपरिषद की घटनोतर स्वीकृति के लिए भेज दिया है। इस गुरुवार को होने वाली बैठक में निर्णय लिया जाएगा।

राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, झारखंड के 49 नगर निकायों में कुल 12 डॉग पाउंड या शेल्टर और 50 केनल संचालित हैं। हालांकि न्यायालय के समक्ष यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये सभी केंद्र एनिमल बर्थ कंट्रोल (ए बी सी) नियमों के तहत संचालित हो रहे हैं या नहीं। इस पर सुझाव दिया गया है कि राज्य सरकार एक विस्तृत शपथपत्र दाखिल कर बताए कि राज्य में कितने एबीसी केंद्र हैं और उनकी दैनिक टीकाकरण व नसबंदी क्षमता क्या है।

नसबंदी और टीकाकरण के आंकड़े

सरकार की और से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में 29,491 कुत्तों की नसबंदी की गई। 2019 से 2025 के बीच 74,315 कुत्तों का टीकाकरण किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में कुत्तों की आबादी के मुकाबले यह संख्या काफी कम है। सुझाव दिया गया है कि जिन शहरों में डॉग बाइट की घटनाएं अधिक हैं, वहां पहले चरण में बड़े स्तर पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाया जाए।

आक्रामक और रेबीज संक्रमित कुत्तों पर स्पष्ट जानकारी नहीं

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं है कि कितने आक्रामक या रेबीज संक्रमित कुत्तों की पहचान की गई। कितनों को डॉग पाउंड या शेल्टर में रखा गया और इन पाउंड की वास्तविक क्षमता कितनी है। न्यायालय ने कहा है कि आक्रामक कुत्तों को स्थायी रूप से रखने के लिए पर्याप्त शेल्टर की व्यवस्था होना जरूरी है।

संसाधनों की भी कमी

राज्य में आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए संसाधन भी सीमित बताए गए हैं। नगर निकायों ने राज्य सरकार से 58 अतिरिक्त डॉग कैचिंग वाहनों की मांग की है। राज्य में वर्तमान में 17 पशु चिकित्सक, 17 डॉग कैचिंग कर्मी और 11 केज्ड डॉग कैचिंग वाहन हैं।

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