
Mahakumbh 2025: प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नातुंग ने अपनी पत्नी मनकी नातुंग व परिवार के साथ पवित्र संगम में पवित्र डुबकी लगाई। दंपति ने गोवर्धन मठ पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ के आश्रम में यज्ञ में भी भाग लिया।
गृह मंत्री ने गंगा में डुबकी लगाई व यज्ञ में भी भाग लिया
नातुंग ने मीडिया से कहा, ”मैं पहले भी कई बार गंगा में डुबकी लगा चुका हूं। लेकिन मैं पहली बार प्रयागराज में कुंभ में शामिल हो रहा हूं, और वह भी महाकुंभ। अपने परिवार के साथ यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। हम आचार्य जी (स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ) के आश्रम गए, गंगा में डुबकी लगाई और एक यज्ञ में भी भाग लिया। अरूणाचल के गृह मंत्री ने कहा, ”144 साल बाद हो रहे महाकुंभ में डुबकी लगाना, बहुत सुखद अनुभूति देता है। मैं हर किसी से यहां आने और डुबकी लगाने तथा मां गंगा तथा देश के विभिन्न हिस्सों से आए साधु-संतों का आशीर्वाद लेने की अपील करता हूं।
योगी आदित्यनाथ को दिया धन्यवाद
उन्होंने कहा, ‘तीर्थयात्रियों के सुगम आवागमन से लेकर उनके ठहरने तक की व्यवस्थाओं के लिए मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं अरुणाचल प्रदेश सरकार की ओर से धन्यवाद देना चाहूंगा।
पूर्वोत्तर के समग्र विकास के अनुभवों को किया साझा
पूर्वोत्तर के समग्र विकास पर टिप्पणी करते हुए, नातुंग ने कहा, “नरेंद्र मोदी जी द्वारा सरकार बनाने के बाद पूर्वोत्तर में जो विकास हुआ है– चाहे वह उग्रवाद निरोध हो, राजमार्ग हो, रेलवे हो या डिजिटल तकनीक हो मैंने पहले कभी नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश म्यांमार, चीन और भूटान के साथ अपनी सीमाएं साझा करता है और सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास बहुत वाइब्रेंट है।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में स्कूल, सड़कें और घर विकसित किए गए हैं ताकि लोग सीमावर्ती इलाकों को छोड़कर न आ जाएं। उन्होंने कहा, ‘पहले लोग कहा करते थे कि सीमावर्ती गांव देश में आखिरी है, लेकिन मोदी जी कहते हैं कि यह हमारे देश का पहला गांव है। हमें उम्मीद है कि भविष्य में और अधिक विकास कार्य होंगे।
पहली बार मैं इसमें शामिल हुआ हूं और वह भी महाकुंभ में- मामा नातुंग
गौरतलब है कि अरुणाचल प्रदेश पश्चिम में भूटान के साथ 160 किमी, उत्तर और उत्तर-पूर्व में चीन के साथ 1,080 किमी और पूर्व में म्यांमार के साथ 440 किमी सीमा साझा करता है। मानकी नातुंग ने कहा, ”अनुभव बहुत अच्छा रहा। मैं बचपन से कुंभ मेले के बारे में सुनता आ रहा हूं, लेकिन यह पहली बार है कि मैं इसमें शामिल हुआ हूं और वह भी महाकुंभ मेला। यह बड़े सम्मान की बात है। यह बहुत अच्छा लगता है। स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने बताया कि ऐसा माना जाता है कि प्रयागराज में कुंभ के दौरान किया जाने वाला यज्ञ किसी अन्य स्थान पर किए जाने वाले यज्ञों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली होता है।

