
रांची: झारखंड में चर्चित अलकतरा घोटाले में सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में दोषी पाए गए ठेकेदार झमन प्रसाद को तीन साल जेल की सजा सुनाई है। साथ ही ठेकेदार को एक लाख रुपये का जुर्माना भी भरना होगा। अगर जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे छह महीने और जेल में काटने होंगे।
नियमों को ताक पर रखकर प्राइवेट एजेंसियों से की खरीद
मामला साल 2005-06 का है। भुरकुंडा से पतरातू के बीच करीब छह किलोमीटर लंबी सड़क की मरम्मत हो रही थी। नियम के मुताबिक,सड़क बनाने के लिए अलकतरा सिर्फ सरकारी एजेंसियों से ही खरीदना था। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर इसे प्राइवेट एजेंसियों से खरीदा गया।
सीबीआई की जांच में पता चला कि इस खरीद-फरोख्त में जमकर हेराफेरी हुई और सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, पूरा घोटाला करीब 20.23 लाख रुपये का था। मामला सामने आने के बाद सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की।
इस मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई के स्पेशल सरकारी वकील सुशील कुमार ने कोर्ट के सामने 14 गवाहों को पेश किया। अदालत ने गवाहों के बयानों और सरकारी दस्तावेजों को देखने के बाद ठेकेदार झमन प्रसाद को दोषी माना। कोर्ट ने कहा कि ठेकेदार के खिलाफ मिले सबूत उसकी भूमिका को साबित करने के लिए काफी हैं।
6 सरकारी इंजीनियर बरी
इस केस में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें ठेकेदार के अलावा छह सरकारी इंजीनियर (चार जूनियर इंजीनियर और दो असिस्टेंट इंजीनियर) शामिल थे। हालांकि, कोर्ट ने माना कि इन इंजीनियरों के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं हैं। संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने सभी छह इंजीनियरों को बरी कर दिया। बरी होने वाले इंजीनियरों में से एक भुवनेश्वर महतो फिलहाल गोड्डा के पथ प्रमंडल में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात हैं, जबकि बाकी के पांच इंजीनियर अब रिटायर हो चुके हैं।

