रांची : झारखंड विधानसभा चुनावों में इस बार आरोप-प्रत्यारोप का दौर सिर्फ चुनावी सभाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी एक कार्टून वॉर चल रही है। जहां इंडी गठबंधन और एनडीए अपने-अपने वादों के साथ जनता को रिझाने में जुटे हैं, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कार्टून के जरिए एक-दूसरे पर निशाना साधा है।

झामुमो का कार्टून: भाजपा की साजिशों पर वार
हाल ही में झामुमो ने एक कार्टून पोस्ट किया, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दुबारा मुख्यमंत्री बनने का दावेदार बताते हुए भाजपा पर तीखे आरोप लगाए गए हैं। झामुमो का यह आरोप रहा है कि भाजपा लगातार हेमंत सरकार के कामों में रुकावट डालती रही है और जनहित के योजनाओं पर अदालत में जनहित याचिकाएं (PIL) लगाकर उन्हें बंद कराती रही है।
कार्टून में हेमंत सोरेन को तीन बैरिकेड्स “जमीन घोटाला में PIL,” “मंईया सम्मान योजना में PIL,” और “नियोजन नीति में PIL” को पार करते हुए दिखाया गया है। झामुमो ने इस कार्टून के साथ संदेश दिया, “भाजपा की हर साजिश को जो पार करता जाए, वो शेरदिल हेमंत सोरेन कहलाए।” इसके साथ ही झामुमो ने नारा दिया, “एक ही नारा, हेमंत दुबारा!”
भाजपा का जवाबी हमला: ‘लूट मचाने वाले हैं हेमंत सोरेन’
झामुमो के इस कार्टून का जवाब भाजपा ने भी एक कार्टून के जरिये दिया। भाजपा के पोस्ट में हेमंत सोरेन को तीन बैरिकेड्स “शराब घोटाला,” “जमीन घोटाला,” और “पत्थर खनन घोटाला” को पार करने की कोशिश में गिरते हुए दिखाया गया है। इस पोस्ट के माध्यम से भाजपा ने हेमंत सोरेन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
भाजपा ने इस कार्टून के साथ लिखा, “पग-पग पर जो लूट मचाए, वो हेमंत सोरेन कहलाए। भागो नहीं, जवाब दो हेमंत।” भाजपा ने साफ तौर पर यह संदेश देने की कोशिश की है कि हेमंत सोरेन सरकार में भ्रष्टाचार और घोटाले बढ़े हैं।
सोशल मीडिया पर कार्टून वॉर बनी चुनावी चर्चा का केंद्र
इस कार्टून वॉर ने सोशल मीडिया पर झारखंड चुनाव को और भी गरमा दिया है। दोनों ही पार्टियां एक-दूसरे पर तीखे शब्दबाण और कार्टूनों के जरिए निशाना साध रही हैं। जनता के बीच इन कार्टूनों को लेकर गहरी दिलचस्पी देखी जा रही है, और इससे स्पष्ट है कि चुनावी माहौल पूरी तरह से सरगर्म है।
आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति के बीच जनता का निर्णय महत्वपूर्ण
झारखंड चुनाव में कार्टून वॉर ने राजनीतिक आरोपों को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। अब देखना यह है कि झारखंड की जनता किस पर विश्वास करती है और चुनाव परिणाम क्या संकेत देते हैं। दोनों ही पार्टियों के लिए यह चुनावी दौर महत्वपूर्ण है, और सोशल मीडिया पर चल रही इस जंग ने जनता के बीच नई चर्चा का विषय खड़ा कर दिया है।
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