Hazaribag (Jharkhand) : झारखंड के हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड अंतर्गत कोयला ट्रांसपोर्टिंग सड़क पर शुक्रवार को अजीबो-गरीब घटनाक्रम देखने को मिला। 2.2 किमी लंबी यह सड़क चट्टी बारियातू कोल माइंस परियोजना से जोरदाग के मुंडा टोली होते हुए लबनिया मोड़ तक जाती है। इस सड़क पर पूर्व कृषि मंत्री योगेन्द्र साव करीब 20 फीट लंबी और चार फीट ऊंची दीवार खड़ी करवा कर कोयला ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह बाधित कर दी। यह कारनामा एक जनवरी की रात हुआ।

मजिस्ट्रेट व पुलिस बल की उपस्थिति में ध्वस्त की गई दीवार
सड़क बाधित होने की जानकारी मिलते ही शुक्रवार की दोपहर केरेडारी व बड़कागांव अनुमंडल प्रशासन हरकत में आया। सीओ राम रतन कुमार वर्णवाल, दंडाधिकारी जेई दिलीप दास समेत कई वरीय अधिकारी के साथ पुलिस बल ने मौके पर पहुंचे। वहां उन्होंने धरना पर बैठे योगेन्द्र साव को सड़क से हटाया और जेसीबी से दीवार ध्वस्त करवा दिया। इसके बाद कोयला परिवन करनेवाले वाहनों का परिचालन फिर से शुरू हुआ।
पांच महीने से धरना-प्रर्दर्शन व ट्रांसपोर्टिंग कर रहे हैं साव
इस दौरान पूर्व विधायक निर्मला देवी भी योगेन्द्र साव के समर्थन में घटनास्थल पर उपस्थित थीं। बताया जाता है कि योगेन्द्र साव मुआवजा मांग को लेकर 1 अगस्त 2025 से ही धरना-प्रदर्शन कर कोयला ट्रांसपोर्टिंग कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे थे। इन्हीं गतिविधियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने केरेडारी के माइंस क्षेत्र में धारा निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
क्या कहते हैं योगेंद्र साव और प्रशासनिक पदाधिकारी
योगेन्द्र साव का कहना है कि जोरदाग के झुमरी टांड़ स्थित लगभग 30 वर्ष पुरानी उनकी फायर ब्रिक्स फैक्ट्री को ध्वस्त कर दी गई है। 2.2 किमी सड़क में करीब 60 डिसमिल जमीन का मुआवजा लंबित है। वे 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत चार गुना अधिक मुआवजा, यानी लगभग एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ की मांग कर रहे हैं। वहीं, चट्टी बारियातू कोल परियोजना के वरीय अधिकारियों ने बताया कि योगेन्द्र साव की चिमनी का मुआवजा 15 जुलाई को ही रांची ट्रिब्यूनल कोर्ट में 1.97 करोड़ रुपये जमा किया जा चुका है।
जमीन पर स्वामित्व है, तो रातों-रात दीवार क्यों खड़ी की?
जानकारी के अनुसार सड़क से संबंधित 60 डिसमिल जमीन योगेन्द्र साव के नाम से दाखिल-खारिज नहीं है। केरेडारी सीओ के अनुसार विवादित भूमि खाता संख्या 13, प्लॉट 190, रकबा एक एकड़ है, जो जंगल, झाड़ी व गैरमजरुआ किस्म की भूमि के रूप में दर्ज है। प्रशासन का कहना है कि यदि जमीन पर उनका वैध स्वामित्व है, तो रातों-रात चुपके से सड़क पर दीवार खड़ी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। फिलहाल प्रशासन ने अवैध रूप से बनाई गई दीवार को ध्वस्त कर कोयला वाहनों का आवागमन सामान्य करवा दिया है।

