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Jharkhand Mining Dispute : खनिज सेस के अधिकार पर केंद्र से तकरार, सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगी हेमंत सरकार

राज्य के खान विभाग ने विधि विभाग से सलाह लेने के बाद इसकी फाइल मुख्यमंत्री के पास भेजी थी। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

by Kanchan Kumar
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रांची : झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के बीच एक बार फिर खनिज राजस्व को लेकर खींचतान तेज हो गई है। केंद्र सरकार के नए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है। राज्य के खान विभाग ने विधि विभाग से सलाह लेने के बाद इसकी फाइल मुख्यमंत्री के पास भेजी थी। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

​दरअसल, केंद्र सरकार ने 18 अगस्त 2026 को नया संशोधित खनिज कानून लागू किया था। इस नए कानून में राज्यों द्वारा खनिजों पर अतिरिक्त टैक्स या सेस लगाने के अधिकारों को सीमित कर दिया गया है। ​झारखंड सरकार का कहना है कि यह कानून राज्यों के अधिकारों पर चोट करता है। अगर यह कानून पूरी तरह लागू होता है, तो राज्य को हर साल भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। इससे कई जन कल्याणकारी और विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

​सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बनाया ढाल

​झारखंड सरकार अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ही वर्ष 2024 के एक ऐतिहासिक फैसले को मुख्य आधार बना रही है। सरकार का तर्क है कि ​सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में राज्यों को खनिजों पर सेस लगाने का अधिकार दिया था। ​इसी फैसले के बाद झारखंड सरकार ने राज्य में खनिज सेस वसूलना शुरू किया था। ​संसद में संशोधन करके सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता।

​14,000 करोड़ के राजस्व पर संकट

​राज्य सरकार के अनुमान के मुताबिक, खनिज सेस के जरिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 14,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद थी। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी कहा है कि केंद्र के नए कानून से राज्य को इस बड़ी राशि का सीधा नुकसान होगा।

​1.36 लाख करोड़ रुपये का पुराना बकाया भी अटका

​विवाद सिर्फ नए सेस तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार का दावा है कि विभिन्न कोयला कंपनियों पर झारखंड का लगभग 1,36,042 करोड़ रुपये का पुराना बकाया भी बाकी है। सरकार को डर है कि केंद्र के नए नियम लागू होने से इस भारी-भरकम राशि की वसूली पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

​झारखंड में फिलहाल लागू नहीं हुआ कानून

​दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सरकार द्वारा 18 अगस्त को कानून लागू किए जाने के बावजूद झारखंड सरकार ने इसे अपने राज्य में लागू नहीं किया है। वर्तमान में कोल इंडिया और अन्य खनन कंपनियां राज्य को सेस का भुगतान कर रही हैं। अब राज्य सरकार इस पूरे मामले पर अदालत से जल्द से जल्द राहत पाने की उम्मीद कर रही है।
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