देवघर : नववर्ष 2026 की पहली सुबह झारखंड में आस्था, भक्ति और श्रद्धा के अद्भुत संगम के रूप में दर्ज हुई। नए साल की शुरुआत भगवान शिव के दर्शन के साथ करने की परंपरा को निभाते हुए झारखंड के प्रसिद्ध मंदिरों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। खासकर देवघर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने एक बार फिर इस पवित्र नगरी की धार्मिक महत्ता को रेखांकित कर दिया।

मंदिर के कपाट खुलते ही मंदिर के बाहर लंबी कतारें
नववर्ष के पहले दिन तड़के मंदिर के कपाट खुलते ही बाबा बैद्यनाथ धाम के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। मंदिर परिसर से लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों तक 4 से 5 किलोमीटर तक कतारें विस्तारित रहीं। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े रहकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन की प्रतीक्षा करते नजर आए। हर-हर महादेव और बाबा बैद्यनाथ की जय के जयघोष से पूरा देवघर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।

नववर्ष पर जलार्पण कर सुख-समृद्धि की कामना
नववर्ष के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर के कपाट सुबह 3 बजकर 5 मिनट पर विधिवत सरकारी पूजा के लिए खोले गए। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए सुबह 4 बजकर 15 मिनट पर दर्शन की अनुमति दी गई। जैसे ही कपाट खुले, श्रद्धालुओं की भीड़ ने पूरे मंदिर परिसर को भर दिया। भक्तों ने जलार्पण कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

हिमालयी फूलों से सजा बैद्यनाथ मंदिर बना आकर्षण का केंद्र
नववर्ष 2026 को खास बनाने के लिए इस बार बाबा बैद्यनाथ मंदिर को भव्य और अलौकिक रूप से सजाया गया। करीब पांच लाख रुपये की लागत से मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया, जिसमें पहली बार हिमालय क्षेत्र से मंगाए गए फूलों का उपयोग किया गया। कार्नेशन, लिलियम, डेजी, क्रिसेंथेमम और गुलाब जैसी दुर्लभ किस्मों के फूलों से सजा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। रंग-बिरंगे फूलों और रोशनी से सजी यह छटा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती नजर आई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया।
भीड़ नियंत्रण के लिए श्रावणी मेला जैसी व्यवस्था

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन पूरी तरह अलर्ट रहा। श्रावणी मेला की तर्ज पर दर्शन व्यवस्था लागू की गई। भीड़ नियंत्रण के मद्देनज़र अर्घ पूजा और आरती दर्शन को अस्थायी रूप से बंद रखा गया। जलार्पण के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया, जबकि प्रवेश और निकास मार्गों पर अतिरिक्त बैरिकेडिंग की गई। पुलिस बल और दंडाधिकारी लगातार मोर्चा संभाले रहे।
शीघ्र दर्शन कूपन की कीमत 600 रुपये
नववर्ष के पहले दिन शीघ्र दर्शन कूपन की कीमत 600 रुपये निर्धारित की गई। बुजुर्गों, दिव्यांगों और विशेष जरूरत वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग से सुविधा उपलब्ध कराई गई। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई और पेयजल, चिकित्सा सुविधा तथा स्वयंसेवकों की तैनाती कर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। एसडीओ रवि कुमार समेत सभी प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए रहे।

रांची, जमशेदपुर सहित पूरे झारखंड में भक्तिमय माहौल
देवघर के अलावा रांची, जमशेदपुर और राज्य के अन्य शहरों में भी नववर्ष 2026 की शुरुआत धार्मिक माहौल में हुई। रांची में पहाड़ी मंदिर, जगन्नाथपुर मंदिर, काली मंदिर और विभिन्न शिवालयों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भजन-कीर्तन और घंटे-घड़ियाल की आवाज़ से वातावरण भक्तिमय बना रहा। जमशेदपुर में बिष्टुपुर कालीबाड़ी, साकची हनुमान मंदिर और मानगो के शिव मंदिरों में भी लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर समितियों और प्रशासन की ओर से स्वच्छता, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए गए।
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