Ranchi : झारखंड में लंबे समय से लंबित पेसा (पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) नियमावली को आखिरकार कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है। हालांकि, इस नियमावली के रास्ते में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की कड़ी आपत्ति सामने आई थी, लेकिन गठित समिति ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और अन्य राज्यों के कानूनी उदाहरणों के आधार पर उनकी आपत्ति को अस्वीकार कर दिया। इसके साथ ही पेसा नियमावली को लागू करने की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।
दरअसल, झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने तब तक लघु खनिजों और बालू घाटों के आवंटन पर रोक लगा दी थी, जब तक पेसा नियमावली को अधिसूचित नहीं किया जाता। इस मामले में अवमानना की कार्यवाही भी शुरू हो चुकी थी। न्यायिक दबाव के बाद सरकार ने तेजी दिखाते हुए पेसा नियमावली-2024 का प्रारूप तैयार किया और इसे 17 विभागों के पास सुझाव व आपत्तियों के लिए भेजा गया। इनमें से स्वास्थ्य विभाग, पर्यटन विभाग, कला-संस्कृति विभाग और महिला-बाल विकास विभाग ने प्रारूप पर पूर्ण सहमति जताई, जबकि शेष 14 विभागों ने विभिन्न आपत्तियां दर्ज कराईं। इन आपत्तियों की समीक्षा के लिए गठित समिति के समक्ष सबसे अहम और मूलभूत आपत्ति कृषि मंत्री की ओर से रखी गई।
कृषि मंत्री का तर्क था कि झारखंड पंचायती राज अधिनियम-2001 गैर-अनुसूचित क्षेत्रों के लिए लागू है, जबकि अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा अधिनियम-1996 प्रभावी है।
ऐसे में पेसा नियमावली को पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने अनुसूचित क्षेत्रों के लिए अलग से स्वतंत्र नियमावली तैयार करने का सुझाव दिया, जिससे पंचायती राज अधिनियम-2001 की संवैधानिक वैधता पर सवाल खड़े हो सकते थे।
समिति ने इस आपत्ति को ठोस तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया। समीक्षा में पाया गया कि पांचवीं अनुसूची वाले दस राज्यों में से आठ राज्यों—हिमाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र—ने अपने-अपने पंचायती राज अधिनियमों के अंतर्गत ही पेसा नियमावली बनाई है।
सबसे मजबूत आधार सुप्रीम कोर्ट का फैसला रहा। केंद्र सरकार बनाम राकेश कुमार मामले में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पेसा अधिनियम के प्रावधानों के आलोक में झारखंड पंचायती राज अधिनियम-2001 पूरी तरह संवैधानिक है। इसी निर्णय के आधार पर कृषि मंत्री की आपत्ति को समिति ने कानूनी रूप से निराधार मानते हुए अस्वीकार कर दिया।
समिति की अनुशंसा के बाद राज्य कैबिनेट ने पेसा नियमावली को मंजूरी दे दी। इसके लागू होने से अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की भूमिका और अधिकार मजबूत होंगे, खासकर खनिज संसाधनों, भूमि और स्थानीय विकास से जुड़े मामलों में। सरकार के सूत्रों का कहना है कि नियमावली को जल्द अधिसूचित किया जाएगा, जिससे हाईकोर्ट में लंबित अवमानना कार्यवाही के समाप्त होने की भी संभावना है।

