Ranchi: सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति की मदद को लेकर झारखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जहां स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने इसे मानवीय कर्तव्य बताया है, वहीं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसे राज्य की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का उदाहरण करार देते हुए सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

इंसानियत के नाते घायल की मदद: मंत्री इरफान अंसारी
डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि गोविंदपुर में हुई दुर्घटना के समय वे मौके पर मौजूद थे और एंबुलेंस की प्रतीक्षा में देरी हो रही थी। ऐसे में उन्होंने बिना देरी किए घायल को अपनी निजी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। मंत्री ने कहा कि यदि वे इंतजार करते, तो घायल की जान भी जा सकती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उसी रास्ते से भाजपा नेताओं की कई गाड़ियां गुजरीं, लेकिन किसी ने रुककर मदद नहीं की। इसके बावजूद जब उन्होंने एक इंसान की जान बचाने का प्रयास किया, तो उस पर भी सस्ती राजनीति की जा रही है। उन्होंने बाबूलाल मरांडी की आलोचना को अमानवीय और असंवेदनशील करार दिया।
विपक्ष का हमला: मंत्री खुद टेम्पो से भेज रहे मरीज, यही है असली व्यवस्था
वहीं दूसरी ओर बाबूलाल मरांडी ने मंत्री के कार्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड सरकार के पास इतनी भी व्यवस्था नहीं है कि सड़क पर घायल व्यक्ति के लिए समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो सके। उन्होंने एक वीडियो साझा किया, जिसमें मंत्री इरफान अंसारी घायल को एक ई-रिक्शा में बैठाकर अस्पताल भेजते नजर आ रहे हैं। मरांडी ने तंज कसा कि जो सरकार एयर एंबुलेंस की सुविधा का ढोल पीटती है, उसकी हकीकत यह है कि मंत्री खुद टेम्पो या ई-रिक्शा से मरीज को अस्पताल भेज रहे हैं। उन्होंने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को झूठे विज्ञापन और दिखावे पर आधारित बताते हुए कहा कि राज्य की स्थिति इतनी जर्जर है कि मंत्री और मुख्यमंत्री तक अपने इलाज के लिए राज्य के अस्पतालों पर भरोसा नहीं करते।
सरकार पर गंभीर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी का संकेत है। उन्होंने कहा कि अगर मंत्री स्तर के व्यक्ति के रहते भी एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मंत्री की सफाई और भावुक अपील
स्वास्थ्य मंत्री ने पुनः स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ एक घायल व्यक्ति की जान बचाना था और इस पर राजनीति करना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि घायल व्यक्ति अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसके परिजन उनके प्रयास के लिए आभार प्रकट कर चुके हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनता असमंजस में
घटना के बाद राजनीति अपने चरम पर है। एक ओर जहां मंत्री इसे इंसानियत की मिसाल बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की असलियत करार दे रहा है। लेकिन इस पूरी बहस के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या झारखंड की स्वास्थ्य सेवा वाकई इतनी कमजोर है कि एक मंत्री को भी निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है?

