रांची : झारखंड के सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों की सेवा संबंधी शिकायतों के समयबद्ध समाधान को अनिवार्य बना दिया गया है। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद झारखंड सरकारी सेवक शिकायत निवारण नियमावली-2026 लागू कर दी गई है। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
नियमावली के अनुसार, सरकारी कर्मचारी या सेवानिवृत कर्मी के सेवा से जुड़ी किसी भी वैध शिकायत का निपटारा हर हाल में अधिकतम 60 कार्यदिवस के भीतर करना होगा। यदि निर्धारित समयसीमा में शिकायतों का निष्पादन नहीं किया गया या आदेशों का पालन लंबित रखा गया, तो संबंधित विभाग के अधिकारी एवं उत्तरदायी कर्मियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने नियमावली के जरिए पहली बार विभागीय जवाबदेही स्पष्ट की है और शिकायत निवारण प्रक्रिया को औपचारिक और बाध्यकारी बनाया है।
नियमावली के अनुसार प्रत्येक विभाग तथा जिला स्तर पर सेवा शिकायत निवारण पदाधिकारी नामित किए जाएंगे, जिनके पास नियमित सरकारी कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मी अथवा मृत सरकारी सेवक के आश्रित अपनी शिकायत लिखित रूप में दर्ज करा सकेंगे।
इस तरह की शिकायतों में होगा तत्काल समाधान
कर्मियों की लिखित शिकायतों में नियुक्ति, सेवा संपुष्टि, वेतन भुगतान, वेतन वृद्धि, प्रोन्नति, कालबद्ध प्रोन्नति, एसीपी, एमएसीपी, वरीयता निर्धारण, अवकाश स्वीकृति, भत्तों के भुगतान, पेंशन, उपादान, ग्रुप बीमा, अव्यवहृत अर्जित अवकाश के नकद भुगतान तथा सामान्य भविष्य निधि से जुड़ी समस्याएं शामिल होंगी। हालांकि अनुशासनिक कार्रवाई, स्थानांतरण, पदस्थापन, प्रतिनियुक्ति और न्यायालय में विचाराधीन मामलों को इस नियमावली के दायरे से बाहर रखा गया है।
तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच करनी होगी शुरू
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिकायत प्राप्त होने के तीन कार्य दिवस के भीतर प्रारंभिक जांच अनिवार्य होगी। यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित उत्तरदायी पदाधिकारी और शिकायतकर्ता को दस्तावेजों सहित सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक दिन सुनवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
सुनवाई के बाद पारित निर्णय लिखित रूप में शिकायतकर्ता को पत्र या ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।
नियमावली में यह प्रावधान भी जोड़ा गया है कि यदि शिकायत किसी अन्य विभाग या जिले से संबंधित हो, तो उसे संबंधित प्राधिकार को स्थानांतरित किया जाएगा और स्थानांतरण में लगा समय 60 दिन की समयसीमा में नहीं जोड़ा जाएगा। इसी प्रकार एनपीएस से ओपीएस में परिवर्तित कर्मियों के पेंशन मामलों में एनएसडीएल से बाइफरकेशन डाटा मिलने तक की अवधि अलग मानी जाएगी।
अनुच्छेद-10 के तहत यदि विभागाध्यक्ष, कार्यालय प्रधान, सेवा शिकायत निवारण पदाधिकारी या अपीलीय प्राधिकार के आदेशों का समय पर अनुपालन नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कारण बताओ नोटिस, विभागीय जांच, स्पष्टीकरण तथा सेवा नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यदि स्वयं शिकायत निवारण पदाधिकारी जान-बूझकर मामले लंबित रखते हैं या सुनवाई में लापरवाही करते हैं, तो उनके खिलाफ भी सक्षम प्राधिकार कार्रवाई करेगा। विभाग के वेबसाइट में भी प्रदर्शित किया जाएगा।
अपील का भी मिलेगा मौका
नियमावली के तहत शिकायतकर्ता यदि निर्णय से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह 30 दिनों के भीतर अपील कर सकेगा। जिला स्तर के मामलों में अपील उपायुक्त के समक्ष तथा विभागीय मामलों में अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव के समक्ष दायर होगी। अपील पर भी अधिकतम 60 कार्य दिवस में निर्णय देना अनिवार्य होगा।
अब काम कराने ने के लिए चक्कर नहीं लगाना होगा
यह प्रयास हो रहा है को कर्मचारियों को वेतन, प्रोन्नति, पेंशन या सेवा लाभों के लिए वर्षों तक विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें और हर स्तर पर शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

