रांची : राज्य में शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया को नई रूपरेखा देते हुए झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 की नई नियमावली जारी कर दी गई है। इस संबंध में स्कूली साक्षरता विभाग झारखंड ने अधिसूचना जारी कर दी है।
नई व्यवस्था लागू होने के साथ अब प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 1 से 5) और उच्च प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 6 से 8) में सहायक आचार्य तथा विशेष प्रशिक्षित सहायक आचार्य पदों पर नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों को इसी नियमावली के अनुरूप पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। लंबे अंतराल के बाद यह नियमावली जारी होने से राज्य के हजारों अभ्यर्थियों के बीच नई उम्मीद जगी है, क्योंकि पिछली पात्रता परीक्षा 2016 में आयोजित हुई थी।
प्राथमिक स्तर के लिए 50 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडिएट पास होना जरूरी
नई नियमावली के अनुसार प्राथमिक स्तर के लिए वही अभ्यर्थी पात्र होंगे जिन्होंने न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडिएट या समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण की हो और साथ में प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में द्विवर्षीय डिप्लोमा प्राप्त किया हो। 9 दिसंबर 2007 से पहले प्रशिक्षण में नामांकित अभ्यर्थियों के लिए 45 प्रतिशत अंक की शर्त लागू रहेगी। इसके अलावा चार वर्षीय बीएलएड, विशेष शिक्षा में डिप्लोमा अथवा स्नातक के साथ द्विवर्षीय डीएलएड करने वाले अभ्यर्थी भी पात्र होंगे।
उच्च प्राथमिक स्तर यानी कक्षा 6 से 8 के लिए स्नातक के साथ डीएलएड, बीएड या समकक्ष प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक अथवा स्नातकोत्तर और बीएड करने वाले अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे, जबकि पुराने प्रशिक्षण विनियमों के तहत 45 प्रतिशत अंक वाले अभ्यर्थियों को भी अवसर मिलेगा। चार वर्षीय बीए बीएड, बीएससी बीएड तथा एकीकृत बीएड-एमएड डिग्रीधारी अभ्यर्थी भी पात्रता के दायरे में रखे गए हैं।
विषयवार पात्रता को भी स्पष्ट किया गया है। गणित एवं विज्ञान शिक्षक बनने के लिए विज्ञान, अभियांत्रिकी, प्रौद्योगिकी, कृषि या गणित विषय में कम से कम तीन वर्षीय स्नातक डिग्री जरूरी होगी तथा 10+2 स्तर पर गणित, भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान या वनस्पति विज्ञान में से कम से कम दो विषय होने चाहिए। सामाजिक विज्ञान शिक्षक के लिए कला, मानविकी, सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य या प्रबंधन विषय में स्नातक अनिवार्य होगा। भाषा शिक्षक के लिए हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू अथवा निर्धारित क्षेत्रीय भाषा में न्यूनतम तीन वर्षीय स्नातक डिग्री आवश्यक रखी गई है।
दो स्तरों पर आयोजित होगी पात्रता परीक्षा
नियमावली के तहत पात्रता परीक्षा दो स्तरों पर आयोजित होगी। प्राथमिक स्तर की परीक्षा में बाल विकास एवं शिक्षण पद्धति, भाषा-1, भाषा-2, गणित और पर्यावरण अध्ययन से कुल 150 प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक खंड में 30 प्रश्न होंगे और कुल 150 अंक निर्धारित रहेंगे। उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा में बाल विकास एवं शिक्षण पद्धति, भाषा-1, भाषा-2 के साथ वैकल्पिक विषय शामिल होंगे। गणित एवं विज्ञान शिक्षक के लिए 50 प्रश्न गणित-विज्ञान तथा 10 प्रश्न कंप्यूटर सामान्य ज्ञान से होंगे। सामाजिक विज्ञान शिक्षक के लिए 50 प्रश्न सामाजिक अध्ययन और 10 प्रश्न कंप्यूटर सामान्य ज्ञान से पूछे जाएंगे। कुल प्रश्न संख्या 150 और कुल अंक 150 होंगे।
दोनों स्तर की परीक्षा की अवधि 2 घंटा 30 मिनट होगी और सभी प्रश्न बहुविकल्पीय होंगे। इसमें किसी प्रकार की निगेटिव मार्किंग नहीं होगी। दृष्टिबाधित, सेरेब्रल पाल्सी तथा दोनों हाथों से दिव्यांग अभ्यर्थियों को 30 मिनट अतिरिक्त समय दिया जाएगा तथा स्क्राइब की सुविधा भी उपलब्ध होगी। उत्तीर्णता के लिए सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक लाने होंगे। पिछड़ा वर्ग-1 और पिछड़ा वर्ग-2 के लिए यह सीमा 55 प्रतिशत रखी गई है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए 52 प्रतिशत अंक पर्याप्त होंगे।
सरकार ने प्रमाणपत्र की वैधता को आजीवन कर दिया है। इसका लाभ 2013 और 2016 में पात्रता परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों को भी मिलेगा। हालांकि स्पष्ट किया गया है कि पात्रता परीक्षा पास करना नियुक्ति का अधिकार नहीं होगा, बल्कि यह केवल नियुक्ति प्रक्रिया में भाग लेने की अनिवार्य योग्यता मानी जाएगी। आयु सीमा के मामले में न्यूनतम आयु 21 वर्ष तय की गई है। अधिकतम आयु राज्य सरकार की सामान्य सेवा नियमावली के अनुसार लागू होगी।
विभिन्न जिलों के लिए जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की सूची जारी
विशेष प्रावधान के तहत पारा शिक्षकों को उनकी संविदा सेवा अवधि के बराबर आयु में छूट दी जाएगी, जो अधिकतम 58 वर्ष तक मान्य होगी। चूंकि पिछली परीक्षा 2016 में हुई थी और अगली परीक्षा 2026 में प्रस्तावित है, इसलिए अभ्यर्थियों को एकमुश्त 9 वर्ष की अतिरिक्त आयु छूट भी दी जाएगी। नियमावली में यह भी उल्लेख है कि अभ्यर्थी अपने अंक सुधारने के लिए एक से अधिक बार परीक्षा दे सकते हैं। यदि कोई अभ्यर्थी कदाचार में पकड़ा जाता है तो उसे अगली दो परीक्षाओं से वंचित किया जा सकेगा। परीक्षा से संबंधित अभिलेख कम से कम सात वर्ष तक सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी परीक्षा प्राधिकार की होगी।
राज्य के विभिन्न जिलों के लिए जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की सूची भी निर्धारित की गई है। रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा जैसे जिलों में नागपुरी, पंचपरगनिया, कुरमाली, मुंडारी, कुड़ुख और खड़िया को शामिल किया गया है, जबकि संताल परगना और कोल्हान क्षेत्र में संथाली, हो, बंगला, उड़िया और खोरठा को भाषा विकल्प के रूप में रखा गया है। यह नियमावली राज्य में सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है और माना जा रहा है कि इसके आधार पर जल्द ही पात्रता परीक्षा का विज्ञापन जारी किया जा सकता है।

