नई दिल्ली: भारत के नए प्रधान न्यायाधीश के रूप में जस्टिस संजीव खन्ना 11 नवंबर को शपथ लेने वाले हैं। यह शपथ ग्रहण मौजूदा प्रधान न्यायाधीश, डी वाई चंद्रचूड़ के 65 वर्ष की उम्र पूरी करने पर उनके पद से मुक्त होने के एक दिन बाद होगा। जस्टिस चंद्रचूड़ ने 8 नवंबर, 2022 को CJI का कार्यभार संभाला था।

कार्यकाल और रिटायरमेंट
जस्टिस खन्ना का कार्यकाल लगभग छह महीने का होगा, और वे 13 मई, 2025 को इस पद से रिटायर होंगे। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘एक्स’ पर इस नियुक्ति की पुष्टि की है, जिसमें कहा गया है कि यह निर्णय भारत के संविधान के तहत माननीय राष्ट्रपति और प्रधान न्यायाधीश के परामर्श के बाद लिया गया है।
जस्टिस खन्ना का न्यायिक सफर
जस्टिस संजीव खन्ना का न्यायिक करियर 2005 में दिल्ली हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शुरू हुआ। 2006 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया, और 18 जनवरी, 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उनका जन्म 14 मई, 1960 को हुआ, और उन्होंने कानून की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के कैम्पस लॉ सेंटर से की।
जस्टिस खन्ना अपने कई महत्वपूर्ण फैसलों के लिए जाने जाते हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVMs): उन्होंने चुनावों में EVM के उपयोग को बरकरार रखा, जिससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को बढ़ावा मिला।
चुनावी बॉण्ड योजना: जस्टिस खन्ना उन न्यायाधीशों की पीठ का हिस्सा थे जिसने राजनीतिक दलों के वित्तपोषण के लिए बनाई गई चुनावी बॉण्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किया।
अनुच्छेद 370: वे उस पीठ में शामिल थे जिसने केंद्र के 2019 में संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा, जो कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करता है।
दिल्ली आबकारी नीति मामला: उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी, जो उस समय सुर्खियों में था।
जस्टिस संजीव खन्ना का न्यायिक करियर प्रभावशाली रहा है, और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों ने भारत की न्यायिक प्रणाली में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। उनके नए कार्यकाल की शुरुआत से देश की न्यायपालिका में नए दिशा-निर्देश और महत्वपूर्ण निर्णयों की उम्मीद की जा सकती है। जस्टिस खन्ना की न्यायिक कार्यप्रणाली और उनके विचार आने वाले समय में समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे।
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