

सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली : हर वर्ष आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को वेद व्यास जी की जयंती को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इसे कई लोग वेद व्यास जयंती के रूप में भी जानते हैं। हिंदू धर्म ग्रंथों में मान्यता है कि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। उन्होंने महाभारत जैसा महाकाव्य रचा।

इसके अलावा ऋषि वेद व्यास ने चार वेदों की रचना की। इसमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद वेद शामिल हैं। 18 पुराणों की रचना का श्रेय भी महर्षि वेद व्यास को ही दिया जाता है। माना जाता है कि वेद व्यास का नाम कृष्णद्वैपायन था।

इनके पिता का नाम महर्षि पराशर तथा माता का नाम सत्यवती था। वेदों की रचना के बाद उन्हें वेद व्यास के नाम से जाना जाने लगा। वेद व्यास की पूजा के लिए सबसे पहले उनके पांच शिष्यों में गुरु पूर्णिमा मनायी। उन्हें आदिगुरु माना जाता है।

इसी परंपरा के अनुसार सनातन अथवा हिंदू धर्मावलंबी अनंत काल से अब तक यह त्योहार मनाते चले आ रहे हैं।
हिंदू धर्म ग्रंथों में क्या है गुरु का स्थान
हिंदू धर्म ग्रंथों में गुरु भगवान माना गया हैं। स्कंद पुराण के गुरुगीता अध्याय में गुरु स्त्रोतम में लिखा गया है कि गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वर, गुरु : साक्षात्परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम:। इसका अर्थ है कि गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महादेव हैं। गुरु ही साक्षात परब्रह्मा हैं। ऐसे गुरु को नमन करता हूं। पुराणों से चली यही परंपरा आज भी भारत की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। कबीर, तुलसी से लेकर मौजूदा समय तक हर कवि ने अपने-अपने तरीके से गुरु की महिमा का गुणगान किया है।
कब मनायी जायेगी गुरु पूर्णिमा
इस वर्ष यानी वर्ष 2023 में गुरु पूर्णिमा तीन जुलाई सोमवार को मनायी जायेगी। हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा आगामी दो जुलाई को रात आठ बजकर इक्कीस मिनट पर प्रारंभ हो रही है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा का समापन आगामी तीन जुलाई शाम पांच बजकर आठ मिनट पर हो रहा है। यानी गुरु पूर्णिमा 2 जुलाई रात 8.21 बजे से प्रारंभ होकर 3 जुलाई शाम 5.08 बजे तक रहेगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश मिश्रा के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर पूजन, स्नान, दान का शुभ मुर्हूत 3 जुलाई सुबह 5.27 बजे से सुबह 7.12 बजे तक है। इसके बाद सुबह 8.56 बजे से सुबह 10.41 बजे तक है। दोपहर में 2.10 बजे से 3.54 बजे तक है। गुरु पूर्णिमा पर कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन ब्रह्मा योग, इंद्र योग और सूर्य व बुध की युति से बुधादित्य राजयोग भी बन रहा है।
कैसे मनायी जाती है गुरु पूर्णिमा
गुरु पूर्णिमा के दिन हिंदू धर्म मानने वाले लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। स्नानादि के बाद साफ कपड़ा पहल कर घर और मंदिरों में पूजा अर्चना करते हैं। गुरु के घर जाकर लोग आशीर्वाद लेते हैं। उपहार स्वरूप अंग वस्त्र सहित अन्य सामग्रियां भेंट करते हैं। जिन लोगों के गुरु इस दुनिया में नहीं हैं, वह लोग गुरुओं की प्रतिमा या चित्र पर माल्यार्पण करते हैं। चरण पादुका की पूजा की जाती है।
क्या होता है लाभ
यह त्योहार गुरु-शिष्य परंपरा को कायम रखने के लिए प्रेरित करता है। ऐसी मान्यता है कि गुरु अपने ज्ञान से शिष्य को सही मार्ग पर ले जाते हैं। भगवान का साक्षात्कार करवाते हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। इस दिन गाय की पूजा, सेवा और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आरोग्य की प्राप्ति होती है। गुरु की पूजा से कुंडली में गुरु दोष समाप्त होता है। इस दिन मंदिरों और मठों में विशेष रूप से गुरु पूजा होती है।
