प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज आयोजित महाकुम्भ मेले बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र संगम पर एकत्र हुए हैं, जहां वे आध्यात्मिक वैभव की अनुभूति करते हैं। कुम्भ मेले के आकर्षण में कुछ संत और बाबा भी शामिल हैं, जिनकी अपनी विशेषताएं और अभ्यास हैं। इनमें छोटू बाबा, चाबी वाले बाबा, बवंडर बाबा और स्प्लेंडर बाबा व अन्य हैं। इन सभी के बीच एक और नाम है, जो इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ये हैं ‘कांटे वाले बाबा’ यानी रमेश कुमार मंझी।
कांटे वाले बाबा कांटों की चटाई पर लेटे रहते हैं। अपनी आध्यात्मिक तपस्या से श्रद्धालुओं को चकित करते हैं। उन्होंने बताया कि, “मैं गुरु की सेवा करता हूं। गुरु ने हमें ज्ञान और पूरी शक्ति दी है। यह भगवान की महिमा है, जो मुझे कांटों पर लेटने की शक्ति देती है। मैं यह पिछले 40-50 वर्षों से कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि मैं यह अपने शरीर के लाभ के लिए करता हूं। यह मुझे कभी चोट नहीं पहुंचाता। जो ‘दक्षिणा’ मिलती है, उसका आधा हिस्सा मैं दान करता हूं और बाकी को अपनी जरूरतों के लिए इस्तेमाल करता हूं।”
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचा महाकुम्भ मेेला
इस बीच प्रयागराज के अरैल टेंट सिटी में 10 देशों के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का आगमन हुआ। इस प्रतिनिधिमंडल को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सार्वजनिक प्रचार और कूटनीति विभाग ने आमंत्रित किया है। इस प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार (16 जनवरी) को त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान किया।
इसके साथ ही यह प्रतिनिधिमंडल यहां होनेवाले महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल होगा। प्रतिनिधिमंडल में फिजी, फिनलैंड, गुयाना, मलेशिया, मॉरीशस, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रतिनिधि शामिल हैं। उनका यह दौरा भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर में वैश्विक रुचि को दर्शाता है।

