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Khila Pustakalaya Initiative : ‘खिला पुस्तकालय’ से बदली स्कूल की तस्वीर, धातकिडीह स्कूल में बच्चों में बढ़ी पढ़ने की ललक

by Rajesh Choubey
Khila Pustakalaya Initiative
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घाटशिला : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में गालूडीह स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, धातकिडीह में ‘खिला पुस्तकालय’ पहल ने बच्चों के बीच पढ़ने की नई संस्कृति विकसित कर दी है। जो बच्चे पहले पुस्तकालय से दूरी बनाकर रखते थे, वे अब खाली समय मिलते ही लाइब्रेरी पहुंचने लगे हैं। पहले स्कूल में स्थिति यह थी कि कक्षा समाप्त होने के बाद बच्चे ज्यादातर खेलकूद में व्यस्त रहते थे, वहीं शिक्षक लगातार उन्हें पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते थे।

बच्चों की पढ़ने में कम रुचि को देखते हुए प्रधानाध्यापक साजिद अहमद, सीनी संस्था की एबलिन होरो, बाल संसद और विद्यालय प्रबंधन समिति ने मिलकर ‘खिला पुस्तकालय’ की शुरुआत की। पहल के तहत बच्चों को पुस्तकालय का महत्व समझाया गया। शिक्षकों ने रोचक कहानियां सुनाकर बच्चों में पढ़ने की रुचि जगाई। कहानी के पात्र, विषय और सीख पर चर्चा से बच्चों की जिज्ञासा बढ़ी। जो बच्चे पढ़ने में कमजोर थे, उन्हें चित्र आधारित किताबों से जोड़ने की कोशिश की गई। धीरे-धीरे वे चित्रों के माध्यम से कहानी समझने लगे और बड़े बच्चों की मदद से पढ़ना सीखने लगे। स्कूल में ‘फ्री रीडिंग टाइम’ की भी व्यवस्था की गई है। इस दौरान बच्चे अपनी पसंद की किताबें चुनकर पढ़ते हैं। शिक्षक निखिल रंजन के मार्गदर्शन में बच्चों ने अब लाइब्रेरी से पुस्तकें इश्यू कराना भी शुरू कर दिया है।


इस अभियान में बाल संसद और बड़े बच्चों की भूमिका भी अहम रही। बड़े विद्यार्थी छोटे बच्चों को कहानी पढ़कर सुनाते हैं, जिससे स्कूल में सामूहिक सीखने का माहौल बना है। अब स्कूल में सकारात्मक बदलाव साफ नजर आ रहा है। बच्चों की भाषा, शब्दावली और विषयों की समझ में सुधार हुआ है। ‘खिला पुस्तकालय’ पहल ने स्कूल में पढ़ने की आदत को मजबूत करने के साथ-साथ एक प्रेरणादायक शैक्षणिक वातावरण तैयार किया है। वहीं पुस्तकालय में बच्चों को माहवारी व जेंडर की समझ विकसित करने के लिए पीरियड पुस्तकालय का भी संचालन किया जा रहा है।

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