- सिंडिकेट बैठक टली, बीएड-पीएचडी मामलों में फिर देरी
जमशेदपुर: कोल्हान विश्वविद्यालय में सात महीने बाद होने जा रही सिंडिकेट की बैठक एक दिन पहले टाल दी गई। यह बैठक 26 अप्रैल को होनी थी। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए बैठक स्थगित करने की जानकारी दी गई। अब यह बैठक मई के तीसरे सप्ताह में होगी।

इस बैठक को लेकर सभी की नजरें टिकी थीं। इसमें बीएड और वोकेशनल शिक्षकों के सेवा नवीनीकरण, पीएचडी प्रवेश परीक्षा का परिणाम जारी करने, कॉलेजों के कंटीजेंसी, परीक्षा और अन्य फंड जारी करने जैसे अहम फैसले लिए जाने थे। सात महीने से बैठक नहीं होने के कारण एफिलिएशन और आधारभूत संरचना से जुड़े खर्चों पर भी निर्णय लंबित है। बैठक टलने से बीएड और वोकेशनल शिक्षक व छात्र परेशान हैं। अब इन मामलों में और देरी होगी।
यह बैठक कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता के कार्यभार संभालने के बाद पहली होती। इसके लिए सभी सदस्यों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था। लेकिन तय तिथि के बावजूद बैठक नहीं हो सकी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कुलपति से की मुलाकात, रखीं छात्रहित की मांगें
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता मधु कोड़ा शुक्रवार को कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता से मिले। उन्होंने छात्रहित से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की और समाधान की मांग की।
कोड़ा ने कहा कि बीएड पाठ्यक्रम में 2015 से लागू नेपर्स पेपर प्रणाली में एक पेपर की लगातार अनुपलब्धता से छात्र प्रभावित हो रहे हैं। इसका समाधान जल्द किया जाए। पीजी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित कर परिणाम शीघ्र जारी किया जाए।
उन्होंने मांग की कि कोल्हान विश्वविद्यालय के अंतर्गत सभी कॉलेजों में क्षेत्रीय भाषाओं–संथाली, हो, कुड़ुख, कुरमाली, उड़िया और बांग्ला के लिए अलग-अलग विभाग बनाए जाएं। नियमित पठन-पाठन की व्यवस्था हो। इससे क्षेत्रीय भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सभी कॉलेजों में रिक्त प्रोफेसर, लेक्चरर और कर्मियों की शीघ्र बहाली की मांग भी रखी। इससे शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चल सकेगा। कुलपति ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना और छात्रहित से जुड़ी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया।
अन्य मांगें भी रखीं
कोड़ा ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाओं की जांच और परिणाम में अनावश्यक देरी से छात्र असमंजस में हैं। परिणाम जल्द प्रकाशित किया जाए। कुछ कॉलेजों में कंप्यूटर ऑपरेटर और सुरक्षा कर्मियों का 10 महीने से मानदेय लंबित है। इससे वे आर्थिक संकट में हैं। अनुबंधित शिक्षकों के नवीनीकरण की प्रक्रिया लंबित है। इससे शिक्षक और छात्र दोनों परेशान हैं। कई कॉलेजों को 10 महीने से अनुदान नहीं मिला है। विकास कार्य ठप हैं। राशि जल्द जारी की जाए।
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