Jamshedpur (Jharkhand) : झारखंड के कोल्हान विश्वविद्यालय में नीड बेस्ड शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। स्नातकोत्तर (PG) प्रथम सेमेस्टर की कॉपियों के मूल्यांकन (Evaluation) कार्य में शामिल न किए जाने से ये शिक्षक नाराज हैं। उनका कहना है कि इस भेदभावपूर्ण रवैये से उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है, क्योंकि मूल्यांकन कार्य में शामिल न होने पर उन्हें कक्षाएं छोड़नी पड़ती हैं और इसके एवज में कोई मानदेय नहीं मिलता।
विश्वविद्यालय के कई पीजी विभाग पूरी तरह से इन्हीं नीड बेस्ड शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में वे मांग कर रहे हैं कि उन्हें भी नियमित शिक्षकों की तरह मानदेय के साथ मूल्यांकन कार्य में शामिल किया जाए।
सरकार के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
झारखंड राज्य विश्वविद्यालय संविदा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार पाण्डेय ने इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि नीड बेस्ड शिक्षकों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए, फिर भी उन्हें कॉपियों की जांच से दूर रखा जा रहा है। हाल ही में पीजी प्रथम सेमेस्टर की कॉपियों की जांच के लिए जारी की गई सूची में इन शिक्षकों को शामिल नहीं किया गया था। अब स्नातक (UG) प्रथम सेमेस्टर की कॉपियों का मूल्यांकन होने वाला है, जिससे यह समस्या और बढ़ जाएगी।
राज्यपाल व उच्चाधिकारियों से मिलेगा संघ
डॉ. पाण्डेय ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं होती है, तो यह सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन का ‘सौतेला व्यवहार’ माना जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी शैक्षिक योग्यता और कार्यप्रणाली नियमित शिक्षकों जैसी ही है, इसलिए उनके साथ ऐसा व्यवहार अनुचित है। डॉ. पाण्डेय ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल, उच्च शिक्षा मंत्री और उच्च शिक्षा सचिव से मिलकर इस भेदभाव को खत्म करने का आग्रह करेगा।

