
जमशेदपुर : दिनभर की व्यस्तता के बीच रात का खाना समय पर खाना अक्सर मुश्किल हो जाता है। कई लोग देर रात भरपेट भोजन करने के बाद सीधे बिस्तर पर चले जाते हैं। कुछ लोग टीवी या मोबाइल देखते हुए पिज्जा, चिप्स और दूसरे स्नैक्स खाते रहते हैं। लेकिन सोने से ठीक पहले भारी भोजन करने की आदत पेट की परेशानी बढ़ाने के साथ रात के आराम में भी खलल डाल सकती है।
खाने का समय और मात्रा, दोनों हैं महत्वपूर्ण
देर रात खाना खाने से हर व्यक्ति की नींद खराब हो, यह जरूरी नहीं है। इसका असर भोजन की मात्रा, उसके प्रकार और खाने के बाद लेटने के समय पर निर्भर करता है। सोने से कुछ घंटे पहले अधिक मात्रा में भोजन करने से बचना बेहतर है। रात का खाना हल्का और संतुलित रखने से पेट में भारीपन की संभावना कम हो सकती है।
खाने के तुरंत बाद लेटना बढ़ा सकता है परेशानी
भोजन के बाद तुरंत लेटने से एसिड रिफ्लक्स की शिकायत बढ़ सकती है। इस स्थिति में पेट की सामग्री भोजन नली की ओर वापस आती है। इससे सीने में जलन, खट्टी डकार या मुंह में खट्टा स्वाद महसूस हो सकता है। जिन लोगों को रात में रिफ्लक्स होता है, उनके लिए खाना और लेटने के बीच कम से कम तीन घंटे का अंतर रखना मददगार हो सकता है।
रात की चाय-कॉफी भी कर सकती है नींद प्रभावित
देर शाम या रात में चाय, कॉफी और कैफीन वाले पेय लेने से नींद आने में कठिनाई हो सकती है। कैफीन का असर कई घंटे तक बना रह सकता है। इसलिए बेहतर नींद के लिए भोजन के साथ पेय पदार्थों के समय पर भी ध्यान देना चाहिए। शराब को नींद लाने का तरीका समझना भी सही नहीं है, क्योंकि यह रात के आराम को प्रभावित कर सकती है।
भूखे सोने के बजाय चुनें हल्का विकल्प
डिनर जल्दी करने का मतलब यह नहीं कि भूख लगने पर भी कुछ न खाएं। वास्तव में भूख महसूस हो तो थोड़ी मात्रा में हल्का स्नैक लिया जा सकता है। हालांकि, सोने से ठीक पहले दोबारा भरपेट खाना खाने से बचें। रिफ्लक्स वाले लोग यह भी देखें कि किन खाद्य पदार्थों से उनके लक्षण बढ़ते हैं, क्योंकि हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
नियमित दिनचर्या से मिलेगा बेहतर आराम
डिनर और सोने का समय नियमित रखने की कोशिश करें। भोजन के तुरंत बाद न लेटें और सोने से पहले मोबाइल तथा तेज रोशनी का इस्तेमाल कम करें। कमरे का शांत वातावरण भी अच्छी नींद में सहायक है। यदि जलन, पेट की परेशानी या बार-बार नींद टूटने की समस्या बनी रहे, तो चिकित्सक से परामर्श लें। केवल खाने का समय बदलकर हर समस्या का समाधान मान लेना उचित नहीं है।
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