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मदरसा एक्ट के प्रावधानों को समझने में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की भूल, सुप्रीम कोर्ट ने..

by The Photon News Desk
Madarsa Act UP
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नई दिल्ली/Madarsa Act UP:  यूपी मदरसा एक्ट को लेकर देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसा एक्ट के प्रावधानों को समझने में भूल की है। वहीं, इलाहाबाद हाई कोर्ट का ये मानना कि ये एक्ट धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के खिलाफ और गलत है। इधर, सुपीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओ पर केंद्र, यूपी सरकार, यूपी मदरसा एजुकेशन बोर्ड को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यूपी और केंद्र सरकार को 31 मई तक जवाब दखिल करने को कहा है।

Madarsa Act UP: 125 साल पुराना मामला है?

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच द्वारा उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 को असंवैधानिक करार दिए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। यूपी मदरसा एक्ट को रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मदरसा बोर्ड की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट का अधिकार नहीं बनता कि इस एक्ट को रद्द करें। 17 लाख छात्र इस फैसले से प्रभावित हुए हैं। वहीं, करीब 25000 मदरसे प्रभावित हुए हैं। ये लगभग 125 साल पुराना है।

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Madarsa Act UP : 17 लाख विद्यार्थियों के लिए राहत

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में होगी। तब तक हाईकोर्ट के फैसले पर रोक रहेगी। ऐसे में उत्तर प्रदेश के 16000 मदरसों के 17 लाख छात्रों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। फिलहाल 2004 के कानून के तहत मदरसों में पढ़ाई चलती रहेगी।
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अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा, जानिए

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यदि आप अधिनियम को निरस्त करते हैं, तो आप मदरसों को अनियमित बना देते हैं और 1987 के नियम को नहीं छुआ जाता। हाईकोर्ट का कहना है कि यदि आप धार्मिक विषय पढ़ाते हैं, तो यह धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि धार्मिक शिक्षा का अर्थ धार्मिक निर्देश नहीं है। सिंघवी ने कहा, सिर्फ इसलिए कि मैं हिंदू धर्म या इस्लाम आदि पढ़ाता हूं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं धार्मिक शिक्षा देता हूं। इस मामले में अदालत को अरुणा रॉय फैसले पर गौर करना चाहिए। राज्य को धर्मनिरपेक्ष रहना होगा, उसे सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए और उनके साथ समान व्यवहार करना चाहिए।

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