वाराणसी : Varanasi Ganga Flood : यूपी के वाराणसी में गंगा नदी अपने उफान पर है। काशी में गंगा नदी तबाही मचाने को आतुर है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण अब वाराणसी के सभी घाट लगभग डूब गए हैं। वहीं प्रसिद्ध अस्सी घाट भी बुधवार को पूरी तरह से जलमग्न हो गया। घाटों पर रखी चौकियां, चेंजिंग रूम, गमले और कुर्सियां सब कुछ पानी में डूब गया है। घाटों के जलमग्न होने के बाद अब गंगा का पानी गलियों की तरफ बढ़ रहा है।

वहीं बाढ़ के कारण अब वाराणसी में सभी क्रूज के संचालन पर भी जल पुलिस ने रोक लगा दी है। बता दें कि पहले ही वाराणसी में नाव के संचालन पर रोक लगाया गया था। उधर दूसरी तरफ अब असी घाट पर जय मां गंगा सेवा समिति की आरती भी घाट के बजाय अब गलियों में आयोजित की जाएगी।
Varanasi Ganga Flood : गली में सांकेतिक तौर पर होगी आरती
जय मां गंगा सेवा समिति के सदस्य यश चतुर्वेदी ने बताया है कि बुधवार की शाम से गंगा आरती सांकेतिक तौर पर तीन अर्चकों द्वारा किया जाएगा। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, वाराणसी में गंगा का जलस्तर 6 सेंटी मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। वहीं बुधवार की सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 68.02 मीटर रिकॉर्ड किया गया। वर्तमान में गंगा खतरे के रेड अलर्ट से करीब 2 मीटर ही दूर हैं। वाराणसी में खतरे का निशान 71.26 मीटर है। जबकि चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर है। साथ ही बता दें कि वाराणसी में बाढ़ का रिकॉर्ड स्तर 73.90 मीटर दर्ज किया गया है।
Varanasi Ganga Flood : छत पर हो रहा शवदाह
बता दें कि वाराणसी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर शवों का अंतिम संस्कार छत पर किया जा रहा है। वहीं बात हरिश्चंद्र घाट की करें तो वहां गलियों में शवदाह शुरू हो गया है। छत और गलियों में शवदाह के कारण यात्रियों को भी खासी परेशानी हो रही है।
Varanasi Ganga Flood : प्रयागराज में भी 5-6 हजार घरों पर बाढ़ का खतरा
बता दें कि प्रयागराज में भी गंगा और यमुना नदी दोनों उफान पर हैं। गंगा का पानी बुधवार को ही लेटे हनुमान मंदिर तक पहुंच गया। वहीं यमुना भी उफान पर हैं। करीब 2000 घरों में पानी भर गया है। 5 से 6 हजार घर खतरे की जद में हैं। अगर नदियों का जलस्तर बढ़ा तो पानी भर जाएगा। प्रयागराज में ऐनुद्दीनपुर इलाके में कमर तक पानी भरा है। छोट बघाड़ा में सैकड़ों घर डूब चुके हैं। साथ ही करेली के गौस नगर और गड्ढा कॉलोनी में 5 फीट तक पानी भर गया है। सड़कों पर नावें चल रही हैं’। लोग या तो घर छोड़कर दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं या फिर छतों पर शरण ले ली है। प्रशासन गंगा-यमुना के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है।

